How 10 Minute Delivery Model Works: कल्पना कीजिए, आपने चाय के लिए गैस जलाई और पता चला चीनी खत्म है. ऐसे में मोबाइल ऐप पर ऑर्डर करते ही 10 मिनट में चीनी घर पहुंच जाती है. यानी चाय जब तक एक दो बार उबाल मारेगी आपके घर तक चीनी पहुंच चुकी होगी. यह किसी जादू जैसा लगता है, जो कि अब Zepto, Blinkit और Swiggy Instamart जैसी कंपनियां संभव बना रही हैं. बड़े शहरों में रहने वाले लोग इन सर्विस का खूब इस्तेमाल करते हैं. 10 मिनट डिलीवरी सर्विस के पीछे तेज बाइक नहीं, बल्कि डेटा, टेक्नोलॉजी और स्मार्ट प्लानिंग का पूरा नेटवर्क काम करता है. Zepto, Blinkit, Flipkart Minutes और Swiggy Instamart जैसी कंपनियों ने क्विक कॉमर्स के जरिए हमारी खरीदारी की आदत ही बदल दी है. आइए समझते हैं कि 10 मिनट की डिलीवरी असल में कैसे संभव होती है.
Quick Commerce क्या है और क्यों इतना तेज है?
क्विक कॉमर्स एक ऐसा मॉडल है जिसमें रोजमर्रा का जरूरी सामान बेहद कम समय में ग्राहक तक पहुंचाया जाता है. यानी कि जो सामान आपको डिलीवर किया जाता है उसका वेयरहाउस 1-2 किलोमीटर से भी कम दूरी पर होता है. इसमें फोकस बड़े ऑर्डर या लंबी दूरी की डिलीवरी पर नहीं, बल्कि आस-पड़ोस से इंस्टेंट सप्लाई पर होता है. Zepto, Blinkit और Instamart जैसे ऐप इस मॉडल को अपनाकर 10 से 15 मिनट की डिलीवरी संभव बना रहे हैं. यह मॉडल खासतौर पर शहरी इलाकों की तुरंत जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. यही वजह है कि इसमें स्पीड सबसे बड़ा फैक्टर होती है.
डार्क स्टोर्स, आपके मोहल्ले का छुपा मिनी वेयरहाउस
10 मिनट की डिलीवरी की सबसे बड़ी ताकत डार्क स्टोर्स हैं. ये आम किराना दुकान नहीं होते, बल्कि छोटे गोदाम होते हैं जो घनी आबादी वाले इलाकों के बेहद करीब बनाए जाते हैं. कई बार ये बेसमेंट, गली या खाली कमर्शियल स्पेस में चलते हैं. ग्राहक यहां जाकर खरीदारी नहीं कर सकते, बल्कि सिर्फ ऐप के जरिए ही ऑर्डर होता है. घर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्टोर होने से डिलीवरी का समय अपने आप कम हो जाता है.
डेटा तय करता है क्या मिलेगा और कब मिलेगा
डार्क स्टोर में कौन सा सामान रखा जाएगा, यह किसी मैनेजर के अनुमान पर नहीं छोड़ा जाता. कंपनियां लगातार यह डेटा एनालिसिस करती हैं कि किस इलाके में किस समय क्या ज्यादा बिकता है. अगर किसी कॉलोनी में रात को आइसक्रीम या स्नैक्स की मांग ज्यादा है, तो स्टोर में वही स्टॉक बढ़ा दिया जाता है. इसका मतलब यह है कि ग्राहक के ऑर्डर करने से पहले ही जरूरी सामान पास में मौजूद होता है. यही डेटा-बेस्ड प्लानिंग डिलीवरी को सुपरफास्ट बनाती है.
ऑर्डर से पहले ही सिस्टम करता है तैयारी
जैसे ही आप ऐप पर प्रोडक्ट सर्च करते हैं, कंपनी का सर्वर एक्टिव हो जाता है. सिस्टम आपके सबसे नजदीकी डार्क स्टोर में स्टॉक चेक करता है और यह तय कर लेता है कि कौन कर्मचारी सामान पैक करेगा. कई बार तो पेमेंट बटन दबाने से पहले ही पैकिंग की तैयारी शुरू हो जाती है. स्टोर के अंदर प्रोडक्ट्स को इस तरह रखा जाता है कि पैकर को कम से कम चलना पड़े. और सामान खोजने में भी कम समय लगे. पूरा ऑर्डर आमतौर पर 60 से 90 सेकंड में पैक हो जाता है.
राइडर और GPS का रियल-टाइम तालमेल
स्टोर के बाहर डिलीवरी राइडर पहले से तैयार रहते हैं. GPS और AI आधारित सॉफ्टवेयर यह तय करता है कि कौन सा राइडर सबसे नजदीक है और किस रास्ते पर ट्रैफिक कम है. सिस्टम को शहर की गलियों, मोड़ों और ट्रैफिक पैटर्न की रियल-टाइम जानकारी होती है. इसी वजह से राइडर बिना तेज रफ्तार या जोखिम उठाए समय पर आपके दरवाजे तक पहुंच जाता है. हर मिनट का कैल्कुलेशन टेक्नोलॉजी से होता है.
10 मिनट की सुविधा ने हमारी आदतें कैसे बदलीं
इस इंस्टेंट डिलीवरी मॉडल ने उपभोक्ताओं की खरीदारी की सोच बदल दी है. अब लोग महीनेभर का राशन एक साथ नहीं खरीदते, क्योंकि भरोसा है कि जरूरत पड़ते ही सामान तुरंत आ जाएगा. इससे फ्रीक्वेंट बाइंग बढ़ी है, जिसका सीधा फायदा क्विक कॉमर्स कंपनियों को मिल रहा है. सुविधा बढ़ी है, लेकिन प्लानिंग की आदत कम होती जा रही है. यही इस पूरे मॉडल का सामाजिक असर भी है.
क्विक कॉमर्स का भविष्य और बढ़ती रफ्तार
Zepto, Blinkit, Swiggy Instamart और Dunzo जैसे प्लेटफॉर्म लगातार अपने नेटवर्क और टेक्नोलॉजी को मजबूत कर रहे हैं. आने वाले समय में डिलीवरी और तेज, ज्यादा पर्सनलाइज्ड और डेटा-ड्रिवन होने की उम्मीद है. 10 मिनट का यह मॉडल अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि शहरी लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन चुका है. टेक्नोलॉजी, डेटा और लोकल मौजूदगी का यह कॉम्बिनेशन ही क्विक कॉमर्स को सफल करते हैं.



