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RAIPUR NEWS : छत्तीसगढ़ में 211 करोड़ रुपये के धान पर मंडराया खतरा बारिश शुरू…

लेकिन उपार्जन केंद्रों में पड़ा है 92 हजार टन धान

रायपुर,28मई 2025(वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही राज्य के धान उपार्जन केंद्रों में संकट गहराने लगा है। प्रदेशभर के 92,303 मीट्रिक टन धान का अब तक उठाव नहीं हो सका है। जैसे-जैसे बारिश तेज होगी, इन केंद्रों में पड़ा धान भीगने और खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह धान लगभग 211 करोड़ रुपये का है और अगर इसे समय पर नहीं उठाया गया, तो भारी नुकसान तय है।

विशेष बात यह है कि इस नुकसान की पूरी जिम्मेदारी उन सहकारी समितियों (सोसाइटियों) पर डाली जाएगी जिन्होंने यह धान खरीदा था। पहले से ही कई समितियों में तेज गर्मी के कारण स्टॉक में कमी आई है, जिसकी भरपाई का दबाव समिति प्रबंधकों पर डाला गया है।

पिछला रिकॉर्ड और मौजूदा स्थिति
राज्य सरकार ने 14 नवंबर से 31 जनवरी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की थी। इस दौरान कुल 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। अधिकांश धान मिलर्स और मार्कफेड के संग्रहण केंद्रों को भेजा गया, लेकिन अब भी कई उपार्जन केंद्रों में हजारों टन धान पड़ा है, जो रिकार्ड में दर्ज है। इसमें से कुछ धान बारिश या सूखने के कारण खराब भी हो चुका हो सकता है।

नीति का उल्लंघन और प्रबंधकों पर दबाव

धान उपार्जन नीति के अनुसार किसी भी सोसाइटी में बफर स्टॉक लिमिट पूरी होने के 72 घंटे के भीतर धान का उठाव या परिवहन किया जाना अनिवार्य है। परंतु सैकड़ों समितियों ने इस नियम का पालन नहीं किया और खरीदी के बाद महीनों बीत जाने के बावजूद उठाव नहीं हो पाया। गर्मी के कारण पहले ही कई जगह धान का वजन घट गया है और अब प्रबंधकों को प्रति क्विंटल 2300 रुपये की दर से नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा जा रहा है। कई प्रबंधकों को नोटिस भी जारी हो चुके हैं और एफआईआर की चेतावनी दी गई है। इस मामले को लेकर कई समिति संचालकों ने हाईकोर्ट का रुख भी किया है।

कहां-कहां उठा लिया गया धान
राज्य के 33 जिलों में से केवल 5 जिलों जांजगीर-चांपा, धमतरी, कोरिया, सरगुजा और सूरजपुर में ही खरीदे गए पूरे धान का उठाव या परिवहन हो चुका है। बाकी जिलों में धान अब भी उपार्जन केंद्रों में पड़ा हुआ है।

कुल नुकसान का अनुमान
अभी तक बचा हुआ धान 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से लगभग 211 करोड़ रुपये मूल्य का है। अगर मानसून के चलते यह धान पूरी तरह खराब हो जाता है, तो इसका सीधा भार सोसाइटी प्रबंधकों पर डाला जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या सरकार समय रहते धान को बारिश से बचा पाएगी, या फिर हर साल की तरह इस बार भी लाखों का अनाज लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा?

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