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]]>शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा अभियान की आगामी स्वीकृति को लेकर भारत सरकार से अभी तक कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसी कारण यह निर्णय लिया गया है कि अतिथि स्पेशल एजुकेटर की सेवाएं 31 मार्च के बाद नहीं ली जाएंगी। गौरतलब है कि इससे पहले इन शिक्षकों की सेवाएं 30 अप्रैल 2026 तक जारी रखने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन अब उस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 31 मार्च के बाद यदि किसी विद्यालय में स्पेशल एजुकेटर कार्यरत पाए जाते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी की होगी।
इस फैसले से प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, वहीं दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अतिथि शिक्षक संघ के सचिव ने कहा कि आईसीटी लेब इंस्ट्रक्टर , स्पेशल एजुकेटर्स को बहाल किया जाए। सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च हर जिले में आईसीटी लैब्स बनाए हैं। इनमें कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर ही बच्चों को डिजिटल टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कराते हैं। इंस्ट्रक्टर नहीं रहेंगे तो बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होगा। 12 महीने की नियुक्ति देने का काम सरकार करे।
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]]>The post आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ ने लॉन्च किया स्मॉलकैप 250 इंडेक्स फंड, उभरती कंपनियों में निवेश का मौका appeared first on Vedant Samachar.
]]>कंपनी के अनुसार, यह फंड Nifty Smallcap 250 Index को ट्रैक करता है, जिसमें निफ्टी 500 में 251वें से 500वें स्थान तक की कंपनियाँ शामिल होती हैं। इस तरह निवेशकों को विकास के शुरुआती चरण में मौजूद छोटी कंपनियों की ग्रोथ में भागीदारी का मौका मिलता है।
इस फंड की प्रमुख खासियत इसका नियम-आधारित (रूल-बेस्ड) और इंडेक्स के अनुरूप निवेश दृष्टिकोण है, जो निवेश में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखता है। यह फंड फाइनेंशियल सर्विस, हेल्थकेयर और कैपिटल गुड्स सहित कई सेक्टर्स में विविध निवेश का अवसर देता है, जिससे पोर्टफोलियो संतुलित और व्यापक बनता है।
लॉन्च के मौके पर कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी Manish Kumar ने कहा कि यह फंड निवेशकों को उभरती कंपनियों की विकास क्षमता में भाग लेने का सरल और प्रभावी माध्यम प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है, जो लंबी अवधि में विविध क्षेत्रों में व्यवस्थित निवेश करना चाहते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 27 फरवरी 2026 तक इस इंडेक्स ने पिछले एक वर्ष में 15.36% और पिछले पांच वर्षों में औसतन 19.04% सालाना रिटर्न दिया है। हालांकि, यह निवेश शेयर बाजार से जुड़ा होने के कारण इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव पड़ सकता है।
यह फंड कंपनी के प्रमुख प्लान जैसे आईसीआईसीआई प्रू सिग्नेचर एश्योर, स्मार्टकिड एश्योर और आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस (SIP+) के तहत उपलब्ध कराया गया है।
कंपनी का कहना है कि इंडेक्स की समीक्षा साल में दो बार की जाती है, जिससे निवेश प्रक्रिया अनुशासित और पारदर्शी बनी रहती है।
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]]>The post ट्रक से टकराकर बस पलटी, 10 लोगों की दर्दनाक मौत; कई की हालत गंभीर appeared first on Vedant Samachar.
]]>पुलिस के अनुसार, घटना शाम करीब साढ़े 6 बजे उमरानाला क्षेत्र में हुई। बस में 40 से अधिक यात्री सवार थे और यह छिंदवाड़ा से उमरानाला की ओर जा रही थी। जानकारी मिली है कि बस में सवार अधिकांश लोग चौरई तहसील में आयोजित हितग्राही सम्मेलन से लौट रहे थे, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए थे।
फिलहाल हादसे के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। घटना के तुरंत बाद पुलिस और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
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]]>The post अस्पताल जाने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखकर बनें ‘मरीज के लिए सबसे बड़ी मदद’ appeared first on Vedant Samachar.
]]>जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती है। इसलिए अस्पताल जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।
अस्पताल में मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक तनाव में होता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि हम संवेदनशीलता और समझदारी के साथ व्यवहार करें। हमारी मौजूदगी से उसे सुकून मिलना चाहिए, न कि उसका तनाव बढ़ना चाहिए। ऐसे समय में यदि हम आर्थिक रूप से थोड़ी मदद कर सकें, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। जैसे हम खुशी के अवसरों पर सहयोग करते हैं, वैसे ही मुश्किल समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इलाज, दवाइयाँ और जांच का खर्च परिवार पर भारी बोझ डाल देता है।
आजकल एक आम समस्या यह भी है कि लोग बिना जानकारी के डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं। इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर सलाह देना मरीज और उसके परिवार के तनाव को और बढ़ा देता है। इलाज डॉक्टर का काम है, इसलिए हमें केवल भावनात्मक सहारा देना चाहिए। मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। “सब ठीक हो जाएगा”, “आप जल्दी ठीक हो जाएंगे” जैसे शब्द मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक उदाहरण देना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हाथ साफ रखना, मास्क पहनना और अस्पताल के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि वहां भर्ती मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर खुद को खांसी-जुकाम या बुखार जैसी समस्या हो, तो अस्पताल जाने से बचना ही बेहतर है।
मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत आराम की होती है, इसलिए ज्यादा देर तक उसके पास बैठना या बातचीत करना सही नहीं है। थोड़ी देर मिलकर हौसला बढ़ाना और फिर वापस आ जाना ही सही तरीका है। अक्सर लोग ज्यादा देर बैठना अपनापन समझते हैं, जबकि इससे मरीज थक जाता है। इसी तरह एक साथ ज्यादा लोगों का जाना भी सही नहीं है। भीड़ होने से मरीज, अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी होती है, इसलिए सीमित संख्या में ही लोगों को जाना चाहिए।
अस्पताल में शांति बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आवाज में बात करना, हँसना या मोबाइल पर जोर से बातचीत करना दूसरों के लिए असुविधाजनक होता है। मोबाइल को साइलेंट रखना और धीरे बोलना ही सही व्यवहार है। साथ ही, मरीज की निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता, इसलिए अनावश्यक सवाल पूछना या रिपोर्ट देखने की जिद करना उचित नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ अपने काम में प्रशिक्षित होते हैं, इसलिए उनके काम में दखल देना या उनसे बहस करना गलत है। इससे इलाज में बाधा आ सकती है और कई बार स्थिति बिगड़ भी सकती है। यदि कोई शंका हो, तो उसे शांत तरीके से समझना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।
खाने-पीने की चीजें ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। हर मरीज की डाइट अलग होती है, इसलिए बिना पूछे कुछ भी देना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार या डॉक्टर से पूछकर ही कुछ ले जाना चाहिए। मरीज के साथ व्यवहार करते समय दया दिखाने के बजाय उसे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना अधिक जरूरी है। “बेचारा” जैसे शब्द उसकी हिम्मत कम करते हैं, जबकि भरोसा और सकारात्मकता उसे ताकत देती है। सिर्फ मिलने जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल मदद करना भी उतना ही जरूरी है। दवा लाना, रिपोर्ट लेना, ब्लड की व्यवस्था करना या परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों में सहयोग करना वास्तव में बड़ी मदद साबित होती है।
अंत में यही समझना जरूरी है कि अस्पताल जाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा व्यवहार, हमारी बात और हमारा सहयोग ही मरीज के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है। जब भी अस्पताल जाएं, इस बात का ध्यान रखें कि आपका उद्देश्य मरीज को राहत देना होना चाहिए, न कि परेशानी। आपकी छोटी-सी समझदारी और संवेदनशीलता किसी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
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]]>The post राष्ट्रीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय रणनीतिकार नियुक्त हुए डॉ. अतुल मलिकराम; समाज के सशक्तिकरण का लिया संकल्प appeared first on Vedant Samachar.
]]>नियुक्ति पत्र जारी करते हुए राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता राघव पटेल और राष्ट्रीय सचिव कैलाश गौर ने बताया कि डॉ. मलिकराम का रणनीतिक दृष्टिकोण समाज के असल मुद्दों को प्रकाश में लाने में सहायक होगा। महासभा का मानना है कि वर्तमान दौर में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों, जैसे युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसर और ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति की आवश्यकता है, जिसे डॉ. मलिकराम के अनुभव से गति मिलेगी।
अपनी नियुक्ति पर जिम्मेदारी व्यक्त करते हुए डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा, “कुर्मी क्षत्रिय समाज का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। मेरा लक्ष्य समाज के हर वर्ग को जोड़कर एक समग्र विकास योजना पर काम करना है। हम विशेष रूप से युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए मार्ग खोलने पर ध्यान देंगे, ताकि वे राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभा सकें।”
डॉ मलिकराम के अनुसार संगठन के जरिए हमारा प्राथमिक फोकस ग्रामीण युवाओं को उच्च शिक्षा और आधुनिक रोजगार के अवसरों से जोड़ना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत करना, देश के विभिन्न राज्यों जैसे मप्र, यूपी, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि में फैले समाज को एक मंच पर लाना, तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक कल्याणकारी नीतियों की पहुँच सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि डॉ. मलिकराम लंबे समय से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने बीइंग रिस्पॉन्सिबल, 2030 का भारत और सटीक राजनीतिक गणनाओं जैसे अभियानों के माध्यम से बुजुर्गों की सेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनके इन उल्लेखनीय योगदानों को देखते हुए समाज के विभिन्न वर्गों ने उनकी इस नियुक्ति का स्वागत किया है। महासभा को पूरा विश्वास है कि उनकी रणनीतिक कार्यक्षमता और नेतृत्व से न केवल संगठन और अधिक मजबूत होगा, बल्कि समाज का हर व्यक्ति विकास की प्रक्रिया से भी जुड़ सकेगा।
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]]>The post स्कोडा ऑटो इंडिया ने लॉन्च की नई ‘कुशाक’, वैल्यू, सेफ्टी और परफॉर्मेंस में नए मानक तय appeared first on Vedant Samachar.
]]>नई कुशाक को आकर्षक डिजाइन, एडवांस टेक्नोलॉजी और सेगमेंट-फर्स्ट फीचर्स के साथ पेश किया गया है। इसमें नया फ्रंट और रियर डिजाइन, एलईडी हेडलैंप और टेललैंप, सीक्वेंशियल टर्न इंडिकेटर्स, एलॉय व्हील्स, इलेक्ट्रिक सनरूफ, क्लाइमेट्रॉनिक ऑटो एसी और टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड रूप से दिए गए हैं। इसके अलावा ‘स्कोडा सुपर केयर’ के तहत 4 साल या 1 लाख किलोमीटर की वारंटी और रोडसाइड असिस्टेंस भी उपलब्ध है।
सुरक्षा के मामले में नई कुशाक को Global NCAP से 5-स्टार रेटिंग मिली है और इसमें 40 से ज्यादा सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। अब इसमें रेन-सेंसिंग वाइपर, रियर वाइपर, डिफॉगर और ऑटो आईआरवीएम जैसे फीचर्स भी जोड़े गए हैं।
नई कुशाक को पांच वेरिएंट—क्लासिक+, सिग्नेचर, स्पोर्टलाइन, प्रेस्टीज और मोंटे कार्लो में लॉन्च किया गया है। कंपनी ने इसमें 1.0 टीएसआई और 1.5 टीएसआई टर्बो पेट्रोल इंजन का विकल्प दिया है। 1.0 टीएसआई इंजन 85 किलोवाट पावर और 178 एनएम टॉर्क जनरेट करता है, जिसमें 6-स्पीड मैनुअल और सेगमेंट-फर्स्ट 8-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलता है। इसकी शुरुआती कीमत 10.69 लाख रुपये रखी गई है।
वहीं, 1.5 टीएसआई इंजन 110 किलोवाट पावर और 250 एनएम टॉर्क के साथ आता है, जिसमें 7-स्पीड डीएसजी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है। यह वेरिएंट 18.79 लाख रुपये से शुरू होता है। खास बात यह है कि इसमें एक्टिव सिलेंडर टेक्नोलॉजी दी गई है, जो बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी सुनिश्चित करती है।
नई कुशाक में सेगमेंट में पहली बार रियर सीट मसाजर, पैनोरमिक सनरूफ, वर्चुअल कॉकपिट और ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक जैसे फीचर्स भी शामिल किए गए हैं। यह एसयूवी आठ रंगों में उपलब्ध है, जिनमें शिमला ग्रीन, स्टील ग्रे और चेरी रेड जैसे नए कलर ऑप्शन भी शामिल हैं।
कंपनी के ब्रांड डायरेक्टर आशीष गुप्ता ने कहा कि नई कुशाक के जरिए कंपनी यूरोपियन टेक्नोलॉजी को अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने और बेहतर वैल्यू देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सेगमेंट-फर्स्ट फीचर्स और बेहतर सेफ्टी के साथ यह एसयूवी ग्राहकों के लिए एक मजबूत विकल्प साबित होगी।
कुल मिलाकर, नई कुशाक को बेहतर डिजाइन, एडवांस फीचर्स, दमदार परफॉर्मेंस और उच्च स्तर की सुरक्षा के साथ भारतीय बाजार में एक प्रीमियम और प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में पेश किया गया है।
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]]>The post एसबीआई म्यूचुअल फंड ने आईपीओ के लिए सेबी में दाखिल किए ड्राफ्ट पेपर्स appeared first on Vedant Samachar.
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इस ऑफर के तहत प्रमोटर्स, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग अपनी हिस्सेदारी कम करेंगे।
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड, एसबीआई और पेरिस स्थित अमुंडी के बीच एक जॉइंट वेंचर है, जिसमें दोनों की हिस्सेदारी क्रमशः 61.98 प्रतिशत और 36.40 प्रतिशत है।
दिसंबर 2025 तक कंपनी का क्वार्टरली एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (क्यूएएयूएम) करीब 12.5 लाख करोड़ रुपए रहा, जिससे यह देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनी हुई है।
एसबीआई म्यूचुअल फंड की स्थापना 1987 में एसबीआई द्वारा की गई थी और यह भारत का पहला नॉन-यूटीआई म्यूचुअल फंड था।
इस इश्यू को मैनेज करने के लिए कई मर्चेंट बैंकर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज़ इंडिया, एचएसबीसी सिक्योरिटीज़ एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया), आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज़, जेफरीज इंडिया, जेएम फाइनेंशियल, मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र्स और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स शामिल हैं।
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]]>The post भारत में लॉन्च हुई ŌURA स्मार्ट रिंग, नींद की आदतों पर चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी appeared first on Vedant Samachar.
]]>इस मौके पर कंपनी ने ‘इंडिया स्टेट ऑफ स्लीप 2026’ नामक एक विस्तृत रिपोर्ट भी जारी की, जिसमें भारतीयों की नींद की आदतों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय दुनिया के उन देशों में शामिल हैं जहाँ लोग सबसे कम सोते हैं। औसतन एक भारतीय व्यक्ति प्रतिदिन केवल 6 घंटे 28 मिनट की नींद लेता है, जो वैश्विक औसत से लगभग 40 मिनट कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लेना जरूरी है, लेकिन बदलती जीवनशैली, देर रात तक काम, अंतर्राष्ट्रीय मीटिंग्स और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के कारण लोगों की नींद लगातार प्रभावित हो रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नींद की खराब आदतों के कारण गहरी नींद (Deep Sleep) में कमी आ रही है और आँखों की पुतलियों की तेज हलचल (REM Sleep) भी प्रभावित हो रही है। यह स्थिति मानसिक संतुलन, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता पर नकारात्मक असर डालती है।
इसके चलते अधिकांश लोग सुबह उठने के बाद भी खुद को तरोताजा महसूस नहीं करते।
ŌURA के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर डग स्विनी ने कहा कि यह रिपोर्ट भारतीयों की जीवनशैली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि ŌURA रिंग लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर बेहतर आदतें अपनाने में मदद करती है।
हल्के और आकर्षक डिजाइन वाली ŌURA Ring 4 को खासतौर पर भारतीय टेक-सेवी ग्राहकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह पूरे दिन पहनने के लिए सुविधाजनक है और उपयोगकर्ता की दैनिक गतिविधियों व नींद के पैटर्न को ट्रैक करती है।
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]]>The post इंदौर में 17–19 अप्रैल को होगा I.I.M.U.N. इंदौर 2026 सम्मेलन, विद्यार्थियों को मिलेगा वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का मंच appeared first on Vedant Samachar.
]]>सम्मेलन का शुभारंभ 17 अप्रैल 2026 को शाम 4:00 बजे उद्घाटन समारोह के साथ होगा। 18 अप्रैल को दिन की शुरुआत योग सत्र से होगी, जिसके बाद विभिन्न समितियों के सत्र आयोजित किए जाएंगे। 19 अप्रैल को समिति सत्र जारी रहेंगे और अंत में शाम 4:00 बजे समापन समारोह के साथ सम्मेलन का औपचारिक समापन होगा।

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न समितियों में चर्चा की जाएगी। MPLA समिति में फसल विविधीकरण, सिंचाई विस्तार और किसानों के ऋण राहत पर विचार किया जाएगा। NITI AAYOG समिति में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय समिति में टियर-2 और टियर-3 शहरों में महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। PMSS समिति में भारत के विमानन क्षेत्र को सशक्त बनाने की रूपरेखा पर चर्चा होगी, जबकि HCC समिति में भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े पहलुओं पर विमर्श किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त WHO समिति में ग्लोबल साउथ में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली की सुदृढ़ता, ECOSOC समिति में संप्रभु ऋण संकट के समाधान और वैश्विक विकास के लिए सतत वित्तपोषण, तथा UNICEF समिति में सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म पर साइबर बुलिंग से बच्चों की सुरक्षा पर चर्चा की जाएगी। UNGA समिति में भू-राजनीतिक संकट और उसके प्रभावों के संदर्भ में जिनेवा कन्वेंशन की पुनर्समीक्षा पर विचार किया जाएगा।
सम्मेलन में Influencer Summit के अंतर्गत साइबर बुलिंग, कंटेंट मॉडरेशन और कॉपीराइट से जुड़े वैश्विक सामुदायिक दिशानिर्देशों पर चर्चा होगी। ICIJ समिति में खोजी पत्रकारिता और मीडिया रिपोर्टिंग तथा IPL समिति में मेगा ऑक्शन 2026 पर भी विमर्श किया जाएगा।
Indian International Model United Nations (I.I.M.U.N.) की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी और वर्तमान में यह संगठन अपने 15वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आज यह पहल 275 शहरों और 40 देशों तक पहुँच चुकी है तथा अब तक 7.5 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुकी है। संगठन का उद्देश्य विचार-विमर्श, संवाद और सम्मेलनों के माध्यम से भारत के विचार को विश्वभर में फैलाकर दुनिया को एकजुट करना है, ताकि आने वाली पीढ़ी के वैश्विक नेता आज के भारत को बेहतर ढंग से समझ सकें। I.I.M.U.N. का मूल सिद्धांत है — “बिना शोर किए नेतृत्व का निर्माण करना।”
विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से I.I.M.U.N. ने 13 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 7.5 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। पिछले 15 वर्षों में 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 30,000 से अधिक विद्यार्थियों ने संगठन के साथ सक्रिय रूप से कार्य किया है। संगठन से जुड़े कई पूर्व सदस्य आगे चलकर सरकारी प्रतिनिधि, अभिनेता, व्यवसायिक नेता, शेफ और सिविल सेवक सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर चुके हैं।
संगठन का सलाहकार मंडल देश और विश्व के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों से सुसज्जित है। इसमें शशि थरूर, अजय पीरामल, दीपक पारेख, करण जौहर, नादिर गोदरेज और हर्ष मरीवाला जैसे नाम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सशस्त्र बलों के पूर्व प्रमुख जैसे वी.पी. मलिक, आर.के. धोवन और पी.वी. नाइक भी इससे जुड़े हैं।पी.टी. उषा और जयंत सिन्हा सहित कई अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी सलाहकार मंडल का हिस्सा हैं। संगठन को एक अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड का भी समर्थन प्राप्त है, जिसमें पूर्व राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। इसके अलावा एक शैक्षणिक सलाहकार बोर्ड भी है, जिसमें राजनयिक, इतिहासकार और विद्वान शामिल हैं।
I.I.M.U.N. के मंच पर अब तक 32 राष्ट्राध्यक्षों सहित सिनेमा जगत के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं और व्यापारिक नेताओं ने सहभागिता की है। इसके अतिरिक्त 34,000 से अधिक वक्ताओं ने विभिन्न सम्मेलनों और कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को संबोधित किया है।
अधिक जानकारी और अपडेट के लिए I.I.M.U.N. इंदौर के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज @iimun.indore को फॉलो किया जा सकता है।
पंजीकरण हेतु यहाँ स्कैन करें –
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]]>The post OMG! मृत घोषित युवक मर्चुरी में हुआ जिंदा, नग्न अवस्था में बाहर भागा; जिला अस्पताल में लापरवाही से मचा हड़कंप appeared first on Vedant Samachar.
]]>जानकारी के अनुसार करीब 20 वर्षीय युवक को सल्फास (जहर) खाने के बाद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और पोस्टमॉर्टम के लिए शव को मर्चुरी भेज दिया गया। युवक को मर्चुरी की ठंडी टेबल पर रखा गया था, जहां कुछ समय बाद उसे अचानक होश आ गया।
होश में आते ही युवक ने खुद को नग्न अवस्था में पाया और घबराकर वहां से बाहर की ओर दौड़ पड़ा। मर्चुरी से अचानक एक युवक को इस हालत में भागते देख आसपास मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे।
बाद में अस्पताल स्टाफ और मौजूद लोगों ने युवक को संभाला और उसे फिर से उपचार के लिए भर्ती कराया गया। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि प्राथमिक जांच में यह लापरवाही सामने आ रही है कि युवक की सही तरीके से जांच किए बिना ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। अब इस मामले को लेकर जांच की मांग उठ रही है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।
यह घटना न केवल चिकित्सा लापरवाही का बड़ा उदाहरण है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करती है। अस्पताल प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
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