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छत्तीसगढ़ में गर्मी के कारण बिजली की खपत बढ़ी, 5800 मेगावाट तक पहुंची मांग

कोरबा,09 अप्रैल (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में गर्मी के कारण बिजली की खपत में वृद्धि हुई है, जिससे बिजली की मांग 5800 मेगावाट तक पहुंच गई है। गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ ही लोग पंखे, कूलर, और AC का अधिक उपयोग करते हैं, जिससे बिजली की मांग बढ़ जाती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी के कारण बिजली की खपत 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है। बिजली की मांग बढ़ने से बिजली की कटौती की समस्या भी बढ़ गई है। गर्मी से बचने के लिए लोग पंखे, कूलर और AC का उपयोग करते हैं, जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है।

बिजली बिल भी गर्मी में बढ़ जाता है, लेकिन बिजली बिल कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। AC का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस पर रखने और रेफ्रिजरेटर को गर्मी के स्रोतों से दूर रखने से बिजली बिल कम किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में बिजली का प्रमुख स्रोत ताप विद्युत है, और प्रति व्यक्ति बिजली की खपत करने के मामले में देश में दूसरा स्थान है। बिजली की जरूरतें हर साल लगभग साढ़े 7 फीसदी की दर से बढ़ रही हैं।

केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने आने वाले वर्ष 2029-30 में छत्तीसगढ़ में 8,805 मेगावाट तक मांग बढ़ने की संभावना जताई है। विद्युत उत्पादन कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 2,980 मेगावाट है, लेकिन तकनीकी खराबी व कम लोड पर चलने की वजह से औसतन पर 2,550 मेगावाट बिजली ही मिल पाती है।

शेष बिजली सेंट्रल पुल से विड्राल करना पड़ता है, जिससे बिजली की मांग बढ़ने पर राज्य में बिजली संकट जैसी स्थिति निर्मित हो सकती है। सरकार को समय रहते भविष्य को लेकर तैयारी करनी होगी और नए विद्युत परियोजनाओं का प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना होगा।

नए विद्युत परियोजनाएं

छत्तीसगढ़ में 8400 मेगावाट के सात संयंत्र स्थापना की योजना है, जिसमें एचटीपीपी में 660-660 मेगावाट को इकाइयों की स्थापना की जानी है। इसके अलावा प्रदेश में 7100 मेगावाट क्षमता के छह नए जल विद्युत संयंत्र लगाने की योजना तैयार की गई है।

कोयले की आपूर्ति

विद्युत संयंत्रों में एक माह से अधिक का कोयला स्टाक है, और कोल इंडिया की संबद्ध कंपनी साऊथ ईस्टर्न कोलफिल्डस लिमिटेड (एसईसीएल) की खदानों से कोयले की नियमित आपूर्ति की जा रही है।

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