भोपाल,08 मार्च । मध्यप्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य करने की तैयारी की है, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 लागू होने से पहले हुई थी। विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया है।
जारी आदेश के अनुसार, ऐसे शिक्षक जो RTE एक्ट 2009 से पहले नियुक्त हुए थे, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। यदि शिक्षक निर्धारित समय में टीईटी परीक्षा पास नहीं कर पाए, तो उनकी सेवा पर संकट आ सकता है। विभाग के निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में अभी पांच साल से अधिक समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक पात्रता सुनिश्चित करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय का असर राज्य के करीब 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों को अब अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। इस फैसले के बाद शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल है, वहीं शिक्षक संगठनों की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
