कोंडागांव, 07 मार्च (वेदांत समाचार)। आमतौर पर लौह हस्तशिल्प को पुरुष प्रधान कार्य माना जाता है, लेकिन कोंडागांव जिले की बेटी नगीना विश्वकर्मा ने इस धारणा को अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से बदल दिया है। लोहे को पिघलाकर उसे मनचाहा आकार देने की कला में महारत हासिल कर नगीना ने न केवल अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया है, बल्कि हस्तशिल्प के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान भी बनाई है। आज इस क्षेत्र में उनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं रह गया है।
अगस्त 1993 में जन्मी नगीना विश्वकर्मा प्रसिद्ध लौह हस्तशिल्पी स्वर्गीय तातीराम विश्वकर्मा की सबसे छोटी पुत्री हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डोंगरीगुड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र में प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बस्तर संभाग मुख्यालय में नर्सिंग की शिक्षा भी ग्रहण की, लेकिन परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही लौह और तुमा हस्तशिल्प की परंपरा ने उन्हें अंततः इसी कला की ओर आकर्षित कर लिया।

लोहार परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही नगीना का झुकाव कला और हस्तशिल्प की ओर रहा। अपने पिता के साथ विभिन्न हस्तशिल्प प्रदर्शनी और बिक्री मेलों में सहयोग करते हुए उन्होंने इस कला की बारीकियों को करीब से सीखा। समय के साथ यह रुचि उनका जुनून बन गई और उन्होंने पूरी तरह से हस्तशिल्प को ही अपना करियर बनाने का निर्णय लिया।
परिवार के सहयोग और पिता के मार्गदर्शन ने नगीना को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने न केवल अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि उसे नई पहचान भी दिलाई। कठिन परिश्रम और समर्पण के कारण आज उनके बनाए लौह हस्तशिल्प की मांग विभिन्न प्रदर्शनी और मेलों में देखने को मिलती है।
हाल ही में आयोजित कुंभ मेले में, जब उनके पिता अस्वस्थ थे, तब नगीना ने छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वयं प्रदर्शनी और बिक्री में भाग लिया और अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस दौरान उनके बनाए हस्तशिल्प को काफी सराहना मिली। इसके अलावा वे देश के कई महानगरों और शहरों में आयोजित हस्तशिल्प मेलों में भी अपनी भागीदारी दर्ज करा चुकी हैं, जहां उन्होंने अपनी कला के माध्यम से प्रदेश का नाम रोशन किया।
नगीना विश्वकर्मा केवल एक सफल हस्तशिल्पी ही नहीं हैं, बल्कि वे नई पीढ़ी को भी इस पारंपरिक कला से जोड़ने का काम कर रही हैं। विभिन्न शासकीय और गैर-शासकीय विद्यालयों तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बतौर प्रशिक्षक अपनी कला का प्रशिक्षण देकर उन्होंने कई युवाओं और महिलाओं को प्रेरित किया है। उनके प्रयासों से कई लोग इस पारंपरिक कला को सीखकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नगीना विश्वकर्मा की प्रेरणादायक यात्रा यह साबित करती है कि अगर हौसला और लगन मजबूत हो तो बेटियां भी परंपराओं की सीमाएं तोड़कर नई मिसाल कायम कर सकती हैं। उनकी सफलता न केवल क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मेहनत और समर्पण से किसी भी क्षेत्र में नई पहचान बनाई जा सकती है।
