Vedant Samachar

क्या है इंश्योरेंस में FDI 100% का मतलब, जिससे बदल जाएगी बीमा सेक्टर की सूरत!

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केंद्रीय वित्त मंत्री की ओर से जब से बजट के दौरान बीमा सेक्टर में FDI यानी फॉरेन डायरेक्ट निवेश की बात हुई है. तभी से इसको लेकर कई सारे कयास लगाए जा रहे हैं. अभी यह खबर भी आ रही है कि निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है. इसके बाद बीमा क्षेत्र में FDI सीमा 74% से बढ़ाकर 100% की जा सकती है. आइए जानते हैं कि बीमा सेक्टर में एफडीआई 100 प्रतिशत करने का क्या मतलब है और इसका बीमा सेक्टर पर असर क्या होगा.

भारत बीमा सेक्टर में विदेशी निवेश के लिए दरवाजे पूरी तरह खोलने की तैयारी में है. 1 फरवरी को वित्त मंत्री ने लोकसभा में संकेत दिया था कि सरकार FDI की सीमा को 100% तक बढ़ाने पर विचार कर रही है. इसके बाद वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों के बीच हुई कई समीक्षा बैठकों के बाद यह प्रस्ताव अब शुक्रवार को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. मंजूरी मिलते ही इंश्योरेंस एक्ट, 1938 में संशोधन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे इस निर्णय को कानूनी आधार मिल सके.

100% FDI की मुख्य शर्तें
सरकार ने एफडीआई की शर्तों को लेकर पहले ही साफ कर दिया है, जिसमें साफ-साफ बताया गया है कि 100% FDI केवल उन बीमा कंपनियों को मिलेगी जो अपने जमा किए गए प्रीमियम को पूरी तरह भारत में ही निवेश करेंगी. विदेशी निवेश से जुड़े मौजूदा नियमों को भी सरल किया जा रहा है, ताकि वैश्विक बीमा कंपनियों को भारत में प्रवेश या विस्तार करने में आसानी हो. सरकार का अनुमान है कि भारतीय बीमा उद्योग अगले पांच वर्षों में औसतन 7.1% वार्षिक वृद्धि हासिल कर सकता है, जो कई देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से तेज है. 100% FDI की अनुमति से दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आएगी, तकनीक और नए उत्पादों का विकास तेज होगा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. इससे प्रीमियम संरचना अधिक पारदर्शी होगी और ग्राहकों को बेहतर व अधिक विकल्प मिलेंगे. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इस कदम को बीमा क्षेत्र की वृद्धि और आधुनिकीकरण का महत्वपूर्ण कदम मान रही है.

क्या बदलेगा?
अब तक किसी विदेशी बीमा कंपनी को भारत में काम शुरू करने के लिए 26% हिस्सेदारी एक भारतीय साझेदार को देनी होती थी. नई व्यवस्था में यह बाध्यता हट जाएगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यह एक “एनेबलिंग प्रोविजन” है, जिसके माध्यम से विदेशी कंपनियां स्वतंत्र रूप से निवेश कर पाएंगी और अपना संचालन बढ़ा सकेंगी. इससे इस सेक्टर में आने वाली नई कंपनियों के लिए आसानी होगी. इसके साथ ही बीमा कवरेज बढ़ेगा और नए रोजगार अवसर भी पैदा होंगे.

भारत में फिलहाल 57 बीमा कंपनियां कार्यरत हैं. 24 जीवन बीमा और 34 गैर-जीवन बीमा कंपनिया है. इसके बावजूद बीमा कवरेज केवल 3.7% है. FY24 में लाइफ इंश्योरेंस कवरेज 2.8% और नॉन-लाइफ 0.9% रहा. सरकार का मानना है कि इस कमी को दूर करने के लिए विदेशी पूंजी और विशेषज्ञता को बड़ा अवसर देना जरूरी है.

सुधार कैसे आगे बढ़ेंगे?
वित्त मंत्रालय इंडियन इंश्योरेंस कंपनीज अमेंडमेंट रूल्स, 2025 का ड्राफ्ट पहले ही जारी कर चुका है. हालांकि, इंश्योरेंस लॉज बिल, 2024 अभी संसद में पेश होना बाकी है. कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी. साल 2024 के अंत तक विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों में 47.82%, निजी क्षेत्र की जनरल इंश्योरेंस कंपनियों में 40.8% और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स में 29.46% थी. सरकार का अनुमान है कि 100% FDI लागू होने के बाद यह निवेश और बढ़ेगा तथा लंबे समय तक स्थिर रहेगा.

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