Vedant Samachar

सर्दियों में क्यों नसों में जमने लगता है खून, क्या इससे बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा?

Vedant Samachar
3 Min Read

देश के कई हिस्सों में लगातार तापमान कम हो रहा है. बढ़ती ठंड हमारे शरीर पर कई तरह से असर डालती है, जिनमें से एक असर खून के गाढ़े होने पर भी पड़ता है. यह स्थिति खासकर उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो पहले से हार्ट के मरीज हैं, हाई बीपी, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से ग्रस्त हैं.

ऐसे में आइए जानते हैं कि सर्दियों में खून गाढ़ा क्यों होता है और क्या इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है?

सर्दियों में खून गाढ़ा क्यों हो जाता है?
राजीव गांधी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि सर्दियों में खून गाढ़ा होने का मुख्य कारण ठंड के दौरान ब्लड वेसल्स का सिकुड़ना है. जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, शरीर गर्मी बचाने की कोशिश करता है और खून का सर्कुलेशन धीमा होने लगता है. इससे खून में प्लेटलेट्स और प्रोटीन की मात्रा बढ़कर उसे थोड़ा गाढ़ा बना देती है.

कई बार पानी कम पीना भी इस समस्या को बढ़ाता है, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन से खून की मोटाई बढ़ जाती है. इसके लक्षणों में हाथ-पैरों में झनझनाहट, उंगलियों का ठंडा पड़ना, चक्कर आना, सिर भारी लगना, सांस फूलना या थकान जल्दी होना शामिल हैं. जिन लोगों को पहले से हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल या शुगर की समस्या है, उनमें यह असर और ज्यादा दिखता है. ऐसे संकेत मिलने पर सावधानी जरूरी है.

क्या खून गाढ़ा होने से बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा?
डॉ. अजीत जैन ने बताया कि सर्दियों में खून गाढ़ा होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है. जब खून मोटा हो जाता है, तो हार्ट को उसे पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. ब्लड वेसल्स सिकुड़ने के कारण खून का फ्लो और धीमा हो जाता है, जिससे ब्लॉकेज की संभावना बढ़ती है.

जिन लोगों को पहले से हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या हाई कोलेस्ट्रॉल है, उन्हें इस समय अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है. ठंड के कारण हार्ट की नसों पर दबाव बढ़ता है और अचानक ब्लड क्लॉट बनने का खतरा भी रहता है. इसलिए सर्दियों में हार्ट की सेहत का विशेष ध्यान रखना जरूरी है.

कैसे करें बचाव?
रोजाना पर्याप्त पानी पिएं.

हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और वॉक करें.

बहुत ठंड में बाहर निकलते समय शरीर को ढकें.

हाई फैट और ऑयली चीजें कम लें.

हार्ट, BP और शुगर के मरीज दवाएं रेगुलर लें.

अचानक ठंडे माहौल में जाने से बचें.

नमक की मात्रा कंट्रोल रखें.

Share This Article