Vedant Samachar

रुपया का हुआ बुरा हाल, अब RBI कैसे करेगा देखभाल, रिकॉर्ड लो पर आई भारतीय करेंसी

Vedant Samachar
3 Min Read

भारतीय रुपये ने गुरुवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की और 90.4675 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. यह स्तर 4 दिसंबर को बने पिछले ऐतिहासिक रिकॉर्ड 90.42 को भी पार कर गया. लगातार गिरते रुपये को संभालने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बाजार में दखल दिया ताकि मुद्रा में और कमजोरी न आए.

2025 में रुपये में आई इतनी गिरावट
2025 रुपये के लिए काफी मुश्किल भरा साबित हुआ है. इस साल अब तक रुपया 5% से ज्यादा गिर चुका है, जिससे यह दुनिया की 31 प्रमुख मुद्राओं में तीसरा सबसे कमजोर परफॉर्मर बन गया है. इससे खराब हालत केवल तुर्की की लीरा और अर्जेंटीना के पेसो की है. खास बात यह है कि यह गिरावट तब हो रही है जब वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स 7% से ज्यादा कमजोर हुआ है.

आखिर क्यों कमजोर हुआ रुपया
रुपये की गिरावट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. भारत का बढ़ता ट्रेड डेफिसिट, भारत से निर्यात होने वाले सामान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ, और विदेशी निवेशकों द्वारा भारत से पैसा निकालने जैसी स्थितियों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है. इसके अलावा, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ ट्रेड डील पर बातचीत रुकी होने से भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. रुपये के 90 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने के बाद मुद्रा पर और दबाव बढ़ा है. मौजूदा विनिमय दर रुपये को उसकी 2011 की वैल्यू के मुकाबले 50% तक गिरा चुकी है.

RBI ने उठाए ये कदम
इस परिदृश्य ने आरबीआई गवर्नर सजय मालहोत्रा और केंद्रीय बैंक के अन्य अधिकारियों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. उन्हें रुपये को लचीला रखने और बाजार को स्थिर बनाए रखने के बीच संतुलन कायम करना है, ताकि किसी तरह की वित्तीय अस्थिरता दोबारा न पैदा हो.

भारत में अभी भी पूंजी नियंत्रण लागू हैं, जिसके कारण रुपया पूरी तरह से कन्वर्टिबल नहीं है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की ट्रेडिंग ज्यादातर NDF (नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड) बाजार में होती है, जहां सौदे डॉलर में निपटाए जाते हैं. आरबीआई विदेशी बाजारों में दखल देने के लिए Bank for International Settlements (BIS) के जरिए सिंगापुर, दुबई और लंदन के प्रमुख बैंकों के साथ मिलकर हस्तक्षेप करता है.

Share This Article