Vedant Samachar

अब नहीं कांपेंगे हाथ… चीन के नए स्टेमसेल थेरेपी से पार्किंसन रोगियों का होगा इलाज, ऐसे करेगा काम

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पार्किंसन बीमारी का आजतक कोई इलाज नहीं है. केवल इसको कंट्रोल किया जाता है, हालांकि अब इसके इलाज में उम्मीद की किरण जगी है. चीन के University of Science and Technology के शोधकर्ताओं की टीम ने नई स्टेम-सेल थेरेपी से पाकिंसन मरीजों को ठीक किया है. यह रिसर्च भविष्य में बीमारी को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है.

पार्किंसन एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को बोलने से लेकर चलने फिरने तक में कठिनाई होती है. हाथ भी कांपते हैं और इंसान अपने रोजाना के काम भी ठीक तरीके से नहीं कर पाता है. जब दिमाग में डोपामिन बनाने वाले न्यूरॉन्स धीरे-धीरे मर जाते हैं तब ये बीमारी होती है. इस वजह से हाथ कांपना, चल फिर न पाना और शरीर का संतुलन न बन पाना जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ये बीमारी आमतौर पर 60 साल से अधिक उम्र में होती है, हालांकि कुछ मामलों में इससे कम उम्र के लोगों में भी ये हो सकती है.

क्या है चीन की नई रिसर्च
चीन के वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल को तैयार किया है. इसको इस तरह बनाया गया है कि इसमें डोपामिन वाले न्यूरॉन्स बनते रहें. अगर किसी में ये कम हुए तो इस स्टेम सेल की मदद से उस मरीज में इनको ट्रांसप्लांट दिया जाएगा. फिलहाल फेज वन का क्लिनिकल ट्रायल पूरा हुआ है. इसमें अब तक 6 मरीजों को यह स्टेम-सेल ट्रांसप्लांट दिया गया है.

रिसर्च में पता चला कि इन 6 मरीजों में पार्किसन के लक्षणों में काफी सुधार हुआ. स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के तीन से चार महीने के भीतर ये मरीज सामान्य हो गए थे. यानी ये ट्रीटमेंट केवल लक्षणों को कम नहीं कर रहा था बल्कि बीमारी का इलाज भी कर रहा है.

शुरुआती दौर में है ट्रायल
भले ही स्टेम सेल ट्रीटमेंट से 6 मरीज की बीमारी काबू मे आ गई, लेकिन ये ट्रायल अभी बहुत ही छोटे लेवल पर है. इसको बड़े पैमाने पर करने की जरूरत है. तभी इसके साइड इफेक्ट्स से लेकर अन्य चीजों का पता चलेगा. हालांकि इस ट्रायल ने यगह साबित कर दिया है कि पार्किंसन जैसी न्यूरोलॉजिक बीमारी में जो न्यूरोरॉन्स खत्म हो जाते हैं उनको भी दोबारा बनाया जा सकता है.

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