सारंगढ़ ,07 दिसंबर(वेदांत समाचार)। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सलौनीकला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का बहुचर्चित मामला फिर चर्चा में है। छात्रों द्वारा ट्रैक्टर में साइकिल लादकर खुद ट्रैक्टर चलाते हुए स्कूल पहुंचने का वीडियो हाल ही में वायरल हुआ था। इस गम्भीर घटना में विभाग ने सिर्फ प्रभारी प्राचार्य और एक शिक्षक की वेतनवृद्धि एक साल तक रोकने जैसी कार्रवाई की है, जिसे लोग खानापूर्ति मान रहे हैं।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
स्थानीय और आसपास के लोग इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि विभाग ने सिर्फ प्राचार्य को बचाने की कोशिश की है। लोगों का तर्क है कि इतनी बड़ी लापरवाही में इतनी हल्की कार्रवाई सवाल पैदा करती है।
पहले भी कई स्कूलों में हुई ऐसी लापरवाही
कुछ महीने पहले देवसागर के शासकीय स्कूल में भी जेवराडीह स्कूल के छोटे बच्चों से साइकिल में गणवेश ढुलवाया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद वहां के तीन शिक्षकों पर कार्रवाई हुई थी। एक शिक्षक को निलंबित किया गया, दूसरे को मूल पद पर भेजा गया और तीसरे से स्पष्टीकरण लेकर चेतावनी दी गई।
इसी तरह धाराशिव शासकीय स्कूल में क्लासरूम के अंदर ही दो शिक्षक आपस में भिड़ गये थे। यह घटना भी वायरल हुई और सीसीटीवी में कैद हो गई। वहां भी दो शिक्षकों पर कार्रवाई की गई थी और एक शिक्षक को सस्पेंड किया गया था।
सलौनीकला मामले में कार्रवाई पर उठे सवाल
अब सलौनीकला स्कूल का वीडियो सामने आने के बाद लोग हैरान हैं कि छात्रों से ट्रैक्टर चलवाने जैसे जोखिमपूर्ण और अनुशासनहीन व्यवहार पर इतनी हल्की कार्रवाई क्यों की गई। प्रभारी प्राचार्य ने स्वयं घटना को स्वीकार किया, फिर भी मामले को सिर्फ थोड़ी सी लापरवाही बताकर शांत करने की कोशिश की गई।
सूत्रों का कहना है कि शुरुआत से ही प्राचार्य को बचाने की कोशिश होती रही और आखिरी आदेश आने पर वही नजर भी आया। सिर्फ वेतनवृद्धि रोकने का आदेश कई लोगों की नजर में विभागीय मिलीभगत का संकेत है।
जनता की मांग कि प्राचार्य को निलंबित किया जाए
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने गंभीर मामले में कम से कम प्राचार्य का निलंबन होना चाहिए था। लेकिन इसके उलट उन्हें राहत मिल गई। लोग इसे समझ से परे बता रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार छात्रों का भविष्य सुधारने के लिए कई कदम उठा रही है। लेकिन दूसरी ओर ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों का कमजोर रवैया उन कोशिशों पर सवाल खड़ा करता है। सलौनीकला की घटना यह दिखाती है कि कुछ शिक्षक बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने से भी नहीं रुकते और अधिकारी भी इस पर सख्त रुख नहीं अपनाते।
मामला पहुंचेगा शिक्षामंत्री तक
इस पूरे मामले की शिकायत शिक्षामंत्री से भी की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस हल्की कार्रवाई के खिलाफ उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराएंगे।



