बीजापुर,06 दिसंबर (वेदांत समाचार)। थाना उसूर क्षेत्र के कर्रेगुट्टा पहाड़ स्थित ताड़पाला घाटी में 02 दिसंबर 2025 को नवीन सुरक्षा एवं जन–सुविधा कैंप की स्थापना सफलतापूर्वक की गई। यह कैंप 04 नवंबर 2025 को स्थापित ताड़पाला बेस कैंप के बाद इस क्षेत्र का दूसरा रणनीतिक कैंप है। माओवादियों के विरुद्ध 01 नवंबर 2025 से चल रहे व्यापक अभियान के तहत डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा 205, कोबरा 210 और केरिपु 196 की संयुक्त टीमों ने इस महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम दिया है।
दुर्गम पहाड़ी इलाकों, सड़क मार्ग के अभाव, कठिन चढ़ाई, लगातार IED और एम्बुश के खतरे जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस और दक्षता का परिचय दिया। कैंप की स्थापना से माओवादी विरोधी अभियानों में तेजी आएगी और क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित होगी। आने वाले समय में इस कैंप को जंगल वारफेयर, टैक्टिक्स, फील्ड क्राफ्ट और अन्य उन्नत प्रशिक्षणों के लिए विशेषीकृत प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना है।
छत्तीसगढ़–तेलंगाना सीमा पर संयुक्त अभियान को प्रभावी बनाने में यह कैंप महत्वपूर्ण साबित होगा। स्थापना के दौरान सतत हेलीकॉप्टर सपोर्ट उपलब्ध रहा और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थल पर पहुंचकर आवश्यक मार्गदर्शन दिया।
बीजापुर जिले में वर्ष 2024 से अब तक 23 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप 790 माओवादी आत्मसमर्पण, 219 माओवादी मारे जाने और 1049 माओवादियों की गिरफ्तारी जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज हुई हैं। इसके अलावा बस्तर संभाग में 210 माओवादियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया है, जो नक्सल उन्मूलन अभियान की बड़ी सफलता है।
‘‘नियद नेल्ला नार’’ योजना के अंतर्गत विकास और नक्सल उन्मूलन कार्यों को गति देने में वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही। बस्तर रेंज आईजी पी. सुन्दरराज, केरिपु ऑप्स के आईजी शालिन, दंतेवाड़ा रेंज डीआईजी कमलोचन कश्यप, केरिपु रेंज डीआईजी बी.एस. नेगी, एसपी बीजापुर डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में 03 दिसंबर को यह कैंप सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।
विकास और सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से बीजापुर जिले में वर्ष 2023–24 और 2024–25 के दौरान कुल 45 नवीन सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। नए कैंप की स्थापना से माओवादी गतिविधियों पर और अधिक अंकुश लगेगा तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान संचालन क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी।



