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Chyawanprash: रोजाना एक चम्मच च्यवनप्राश से कायाकल्प जिंदगी, जानें जड़ी बूटियों की ताकत

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च्यवनप्राश का नाम सुनते ही बहुत से भारतीयों को पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं, दादा-दादी की बातें याद आने लगती हैं जब वो सुबह-सुबह एक चम्मच च्यवनप्राश खाने की सलाह देते थे. च्यवनप्राश यानी जड़ी-बूटियों की तीखी-मीठी खुशबू वाली औषधि, जिसे खाने के तुरंत बाद शरीर में एक गर्माहट सी महसूस होती है. बाद के दौर में नई-नई स्फूर्तिदायक दवाइयों के बीच कुछ लोगों ने भले ही इसे भुला दिया था लेकिन आज की तारीख में फिर से इसकी जरूरत को गंभीरता से समझा जाने लगा है.

आज बहुत से लोग जैसे-जैसे पारंपरिक उपचारों की ओर लौट रहे हैं, च्यवनप्राश एक बार फिर से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल हो गया है. चुस्ती-फुर्ती के लिए च्यवनप्राश जरूरी हो गया है. और डाबर जैसे सबसे पुराने और भरोसेमंद ब्रांड को लोग खूब अपना रहे हैं जो कि प्राचीन ग्रंथों में लिखे नुस्खों के आधार पर तैयार किए गए हैं.

कायाकल्प करता है च्यवनप्राश
च्यवनप्राश मूल रूप से एक आयुर्वेदिक औषधि है. किंवदंतियों के मुताबिक इसे ऋषि च्यवन ने अपनी शक्ति और यौवन को फिर से हासिल करने में मदद के लिए बनाया था. इसीलिए इसका नाम च्यवनप्राश दिया गया है. आयुर्वेद में इसे ऐसा टॉनिक बताया गया है जो ताकत बढ़ाता है, तंदुरुस्त रखता है, दिमाग तेज बनाता है और लंबी उम्र प्रदान करता है. आयुर्वेद में ऐसा भी बताया गया कि जो लोग नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं, वे पाचन और मौसम संबंधी बीमारियों से मुक्त रहते हैं, साथ ही एनर्जी से युक्त होते हैं. सुंदर त्वचा के भी मालिक होते हैं. पुराणों में इसे कायाकल्प करने वाला उपचार बताया गया है.

हर्बल पोषक तत्वों से भरपूर
डाबर का च्यवनप्राश इन्हीं प्राचीन विधियों से तैयार किया गया है. इसमें घी, तिल के तेल, शहद और चीनी के साथ चालीस से ज़्यादा जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं. इसका मुख्य घटक आंवला है, जो प्रकृति के एंटीऑक्सीडेंट के सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक है. साथ ही इसमें दालचीनी, इलायची और पीपली जैसे मसाले और औषधि भी शामिल हैं. घी और तिल के तेल में मौजूद वसा इन जड़ी-बूटियों को शरीर में पहुंचाने में मदद करती है. आयुर्वेदिक औषधियां हमेशा इसी पर ज़ोर देती हैं. इसमें हर्बल पोषक तत्व भी शामिल हैं.

विटामिन सप्लीमेंट्स के समान
गौरतलब है कि आधुनिक अनुसंधान में अब प्राचीन उपचार की विधियों के महत्व को फिर रेखांकित किया जाने लगा है. हाल के समय में च्यवनप्राश पर कुछ वैज्ञानिक अध्ययन भी हुए हैं. इसमें डाबर च्यवनप्राश की विधियों का भी परीक्षण किया गया है. जिसमें बताया गया है कि डाबर च्यवनप्राश में सभी योग्य मानकों का पालन किया गया है. इसके सेवन से इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है, सुरक्षात्मक एंटीबॉडी बढ़ाता है और एलर्जी को दूर करता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट क्षमता भी है. कुछ नतीजे बताते हैं कि इसका रोजाना सेवन विटामिन सप्लीमेंट्स के समान है.

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