Vedant Samachar

संसद के शीतकालीन सत्र से पहले मोदी बोले: यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए

Vedant samachar
5 Min Read

नई दिल्ली,01दिसंबर । संसद के शीतकालीन सत्र की आज यानी एक दिसंबर से शुरुआत हो रही है। इससे पहले प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को भी कड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि ये शीतकालीन सत्र सिर्फ प्रथा नहीं है। ये देश को प्रगति की ओर तेज गति से ले जाने के जो प्रयास चल रहे हैं, उसमें ऊर्जा भरने का काम यह शीतकालीन सत्र करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। भारत ने लोकतंत्र को जिया है, लोकतंत्र के उमंग और उत्साह को समय समय पर ऐसे प्रकट किया है कि लोकतंत्र के प्रति विश्वास और मजबूत होता रहता है।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि लंबे समय से मेरी सबसे बड़ी चिंता रही है कि जो सदन में जो पहली बार चुनकर आए हैं या जो छोटी आयु के हैं, वैसे सभी दलों के सभी सांसद बहुत परेशान हैं, बहुत दुखी हैं। उन्हें अपने सामर्थ्य का परिचय कराने का अवसर नहीं मिल रहा है। अपने क्षेत्र की समस्या बताने का अवसर नहीं मिल रहा है।

पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्र की विकास यात्रा में वे अपने कुछ विचार बताना चाह रहे हैं, उस पर भी रोक लगा दी जा रही है। कोई भी दल हो, हमें अपने नई पीढ़ी के सांसदों को अवसर देने चाहिए। हमें उन्हें अवसर देना चाहिए। उनके अनुभवों का सदन को लाभ मिलना चाहिए। मेरा आग्रह रहेगा कि हम इन चीजों को गंभीरता से लें।

सदन में ड्रामा नहीं- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने विपक्षी दलों को संदेश देते हुए सख्त अंदाज में कहा कि ड्रामा करने के लिए बहुत सी जगहें होती हैं, जिसको करना है करते रहें, लेकिन यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए, पूरा काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारों के लिए भी पूरा देश पड़ा है। जितने नारे बुलवाने हों, पूरा देश पड़ा है। जहां पराजित होकर आए हो, वहां बोल चुके हो, जहां पराजित होने के लिए जाने वाले हो वहां भी बोल लीजिए। लेकिन यहां तो नारे नहीं, नीति पर बल देना चाहिए। वो आपकी नीयत होनी चाहिए।

इस दौरान पीएम मोदी ने यह भी कहा कि हो सकता है राजनीति में नकारात्मकता कुछ काम आती होगी, लेकिन देश निर्माण के लिए सकारात्मक सोच भी होनी चाहिए। नकारात्मकता को अपनी मर्यादा में रखकर देश निर्माण पर ध्यान दें, ऐसी मेरी अपेक्षा रहेगी।

जीएसटी रिफॉर्म्स पर भी बोले पीएम
पीएम मोदी ने आगे कहा कि हमारे नए सभापति आज से उच्च सदन का मार्गदर्शन करेंगे, मैं उन्हें शुभकामना देता हूं। जीएसटी रिफॉर्म्स यानी नेक्स्ट जेन रिफॉर्म्स ने देशवासियों के प्रति श्रद्धा का वातावरण पैदा किया है। उस दिशा में बहुत सारे काम होने वाले हैं। पिछले कुछ समय से हमारे सदन को या तो चुनावों की वॉर्मिंग अप के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, या पराजय की बौखलाहट को निकालने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ प्रदेश ऐसे हैं कि वहां वर्षों सत्ता में रहने के बाद इतनी एंटी-इन्कंबेंसी है कि वहां वे अपनी बातें बताने जा नहीं पा रहे। वहां लोगों के बीच जा नहीं पा रहे। इसलिए सारा गुस्सा यहां सदन में आकर निकालते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि सदन को अपने उस राज्य की राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की एक नई परंपरा को कुछ दलों ने जन्म दिया है। उन्हें एक बार चिंतन करना चाहिए कि 10 साल से ये खेल खेल रहे हैं, देश स्वीकार नहीं कर रहा है उनको। तो अपनी रणनीति थोड़ा बदलें।

पीएम ने कहा कि मैं टिप्स देने के लिए तैयार हूं, उनको कैसे परफॉर्म करना चाहिए। लेकिन कम से कम सांसदों के हक पर रोक मत लगाइए। सांसदों को अभिव्यक्ति का अवसर दीजिए। अपनी निराशा और पराजय में सांसदों की बलि मत चढ़ाइए।

Share This Article