Vedant Samachar

आज से संसद का शीतकालीन सत्र, SIR पर हंगामे के आसार; कौन-कौन से बिल होंगे पेश?

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संसद का शीतकालीन सत्र आज (एक दिसंबर) से शुरू हो रहा है. वहीं कांग्रेस समेत विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है. शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामेदार रहने और इसमें गतिरोध पैदा होने के आसार रविवार को उस वक्त दिखाई दिए, जब अधिकतर विपक्षी दलों ने एक सुर में यह मांग उठाई कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा कराई जानी चाहिए.

हालांकि, सरकार ने कहा कि संसद की कार्यवाही अच्छी तरह चलनी चाहिए और वह गतिरोध की स्थिति को टालने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत जारी रखेगी. सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चुटीले अंदाज में यह भी कहा कि यह शीतकालीन सत्र है और इसमें सबको ठंडे दिमाग से काम करना चाहिए.

संसद को चलाने में सहयोग करे विपक्ष

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत से उत्साहित केंद्र सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है. बता दें कि सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक को किरेन रिजिजू ने सकारात्मक करार देते हुए कहा कि इसमें जो भी सुझाव आए हैं, उनको विचार के बाद बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) में रखा जाएगा. सरकार की तरफ से आश्वासन देता हूं कि संसद का शीतकालीन सत्र अच्छी तरह से चलाने के लिए विपक्ष के साथ बातचीत करते रहेंगे. विपक्ष के नेताओं से अनुरोध है कि संसद को अच्छी तरह से चलाने में सहयोग करें.

रिजिजू का कहना था, लोकतंत्र, विशेष रूप से संसदीय लोकतंत्र में गतिरोध होते हैं, राजनीतिक दलों में मतभेद होते हैं. इसके बावजूद हम सब तय करें कि सदन में गतिरोध पैदा नहीं करना है और अपनी बात रखकर विरोध दर्ज कराना है, तो सदन चलेगा.

‘एसआईआर पर चर्चा नहीं हुई तो संसद नहीं चलने देंगे’

उन्होंने एसआईआर के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर कहा कि विपक्षी दलों में कई नेता है जो संसद चलाना और मुद्दे उठाना चाहते हैं. इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि सभी विपक्षी दल एसआईआर का मुद्दा उठाकर संसद की कार्यवाही बाधित करना चाहते हैं. उनका कहना था कि विपक्ष ने कई मुद्दे रखे हैं, उनमें से एसआईआर भी एक है. रिजिजू ने कहा कि एसआईआर पर चर्चा नहीं हुई तो संसद नहीं चलने देंगे, ऐसा सब राजनीतिक दलों ने नहीं कहा है. किसी ने बाहर बयान दिया है तो उसे सामूहिक बयान नहीं मानना चाहिए.

किन-किन मुद्दों पर चर्चा की मांग

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में एसआईआर के साथ ही दिल्ली विस्फोट की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. इसके साथ ही, उन्होंने वायु प्रदूषण, विदेश नीति, किसानों की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और कुछ अन्य विषयों पर सत्र के दौरान चर्चा कराने का आग्रह किया.

36 राजनीतिक दलों के 50 नेता बैठक में शामिल

सर्वदलीय बैठक में 36 राजनीतिक दलों के 50 नेता शामिल हुए. बैठक में सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए. कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव, द्रमुक के तिरुचि शिवा और कई अन्य दलों के नेता बैठक में शामिल हुए.

इन विधेयकों को किया गया सूचीबद्ध

  • सरकार ने शीतकालीन सत्र में पेश करने के लिए नौ आर्थिक विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें बीमा कानूनों में संशोधन करने वाला एक विधेयक और तंबाकू तथा पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर कर और उपकर लगाने से संबंधित दो अन्य विधेयक शामिल हैं. साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों का पहला बैच शीतकालीन सत्र (1-19 दिसंबर) के दौरान पेश किया जाएगा.
  • आगामी सत्र के लिए संसद सदस्यों को भेजी गई विधेयकों की सूची के अनुसार, सरकार नई पीढ़ी के वित्तीय सुधारों के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के लिए बीमा कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करने की योजना बना रही है. अब तक बीमा क्षेत्र ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( एफडीआई) के माध्यम से 82,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है.
  • इसके अलावा, केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 और ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’ को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. विधेयक में सिगरेट जैसे तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने का प्रावधान है, जो जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा.
  • स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025′ पान मसाला पर लगने वाले मुआवजा उपकर की जगह लेगा. इसका मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए संसाधन बढ़ाना और उन मशीनों या प्रक्रियाओं पर उपकर लगाना है, जिनसे निर्दिष्ट वस्तुओं का निर्माण या उत्पादन किया जाता है.
  • वर्तमान में तंबाकू और पान मसाला पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है, और इसके साथ ही अलग-अलग दरों पर मुआवजा उपकर भी वसूला जाता है.
  • इसके अलावा, प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक 2025 को पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. यह विधेयक व्यापार में आसानी के लिए एक एकीकृत प्रतिभूति बाज़ार संहिता सुनिश्चित करेगा. जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए लाया जाएगा. यह विधेयक अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था और इसे एक चयन समिति को भेजा गया था, जिसे शीतकालीन सत्र के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.
  • शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले अन्य आर्थिक विधेयकों में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025, मणिपुर माल और सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025, राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2025 और कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं.
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