भोपाल ,29नवंबर : मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियों की व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन किया है। वित्त विभाग ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम 2025 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। इससे प्रदेश के 7 लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित होंगे। आने वाले 35 दिनों के भीतर कर्मचारियों की अवकाश प्रणाली पहले की तुलना में पूरी तरह बदल जाएगी। नए नियमों से अवकाश के प्रकार, वेतन, अवधि और मंजूरी की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सुधार और सख्ती दोनों होने जा रही है।
महिला कर्मचारियों की चाइल्ड केयर लीव में बड़ा बदलाव
नए नियमों का सबसे बड़ा असर महिला कर्मचारियों की चाइल्ड केयर लीव (CCL) पर होगा। अब तक महिला कर्मचारियों को 2 साल यानी 730 दिन की CCL के दौरान 100% सैलरी मिलती थी। लेकिन संशोधित नियमों में इस लाभ को दो भागों में विभाजित किया गया है। अब:
पहले 365 दिन पर मिलेगा 100% वेतन,
अगले 365 दिन पर मिलेगा 80% वेतन।
सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था अधिक संतुलित और न्यायसंगत होगी और इससे वित्तीय भार नियंत्रित रहेगा।
कर्मचारियों को हर वर्ष मिलेंगे 30 दिन अर्जित अवकाश
नई नीति के तहत कर्मचारियों को हर वर्ष 30 दिन अर्जित अवकाश (Earned Leave – EL) का प्रावधान किया गया है। इसे दो भागों में बांटा गया है—
पहले छह महीने में 15 दिन EL,
और अगले छह महीने में 15 दिन EL।
इसके साथ ही यह भी नियम लागू होगा कि किसी भी कर्मचारी को एक बार में 5 साल से अधिक का लगातार अवकाश नहीं दिया जाएगा। अवकाश को मंज़ूरी देने का अंतिम अधिकार अब संबंधित प्राधिकारी के हाथ में होगा, जिससे अवकाश देने की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और नियंत्रित हो सकेगी।
स्टडी लीव के लिए नए नियम
जो कर्मचारी अध्ययन या प्रशिक्षण के लिए अवकाश लेना चाहते हैं, उन्हें स्टडी लीव की सुविधा दी जाएगी। इसके अनुसार:
कर्मचारियों को एक साल तक की स्टडी लीव मिल सकती है।
पूरी सेवा अवधि में अधिकतम 24 महीने की स्टडी लीव का प्रावधान है।
इस दौरान सभी शैक्षणिक खर्च (फीस आदि) स्वयं कर्मचारी को वहन करने होंगे।
इसके अतिरिक्त, स्टडी लीव पर जाने से पहले बॉन्ड भरना अनिवार्य होगा ताकि कर्मचारी समय पर वापस कार्यभार संभाल सके।
मेडिकल लीव में भी आया बड़ा परिवर्तन
नए नियमों में मेडिकल लीव की प्रक्रिया भी पहले से अधिक सख्त बना दी गई है। अब यह जरूरी नहीं कि कर्मचारी द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट देने पर अवकाश स्वीकृत हो जाए। अंतिम निर्णय पूरी तरह स्वीकृत अधिकारी पर निर्भर करेगा।
इसके अलावा, कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में 180 दिन का आधे वेतन वाला अवकाश बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के मिल सकेगा। यदि कर्मचारी इस अवधि के दौरान इस्तीफा देता है, तो ली गई छुट्टी को अर्ध-वेतन अवकाश माना जाएगा और वेतन का अंतर वापस लिया जाएगा।
नए नियमों से क्या बदल जाएगा?
इन नए प्रावधानों से मध्यप्रदेश की सरकारी सेवा में अवकाश व्यवस्था अधिक स्पष्ट, व्यवस्थित और नियंत्रण आधारित हो जाएगी। छुट्टियों की मंजूरी में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों के लिए लाभों की संरचना भी अधिक व्यवस्थित होगी। सरकार ने कहा है कि यह बदलाव प्रशासनिक दक्षता और सेवा अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किए जा रहे हैं।



