चने की जगह सरसों और गेहूं की फसल को तरजीह दे रहे राजस्थान के किसान, सरकार की कोशिशों को दे रहे झटका…

वर्तमान रबी सीजन में राजस्थान के किसान चना की जगह सरसों और गेहूं की फसल को तरजीह दे रहे हैं. अभी तक हुई बुवाई के आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में चना का रकबा घटा है जबकि सरसों और गेहूं के रकबे में भारी वृद्धि हुई है. इस रबी सीजन के आंकड़े सरकार की उस कोशिश को झटका देने के लिए काफी हैं, जिसमें अनाज की जगह दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

राज्य में तिलहन और खासकर सरसों के रकबे में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन दलहन में चना का बुवाई क्षेत्र घटा है और अनाज यानी गेहूं के रकबे में बढ़ोतरी हुई है. द हिन्दू बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में सरसों का क्षेत्र 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है. 26 नवंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 32.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तिलहन की बुवाई हुई है.

सरकार के लक्ष्य से काफी अधिक हुई सरसों की बुवाई

राजस्थान सरकार का लक्ष्य इस बार सरसों के रकबे को पिछले साल के 27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से बढ़ाकर 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र करना था. हालांकि अभी ही किसान सरकार के लक्ष्य से काफी आगे निकल गए हैं जबकि अभी पूरा आंकड़ा आना बाकी है.

रबी सीजन की सबसे प्रमुख फसल गेहूं की बात करें तो किसानों ने अभी तक 25 प्रतिशत तक रकबा बढ़ा दिया है जबकि सरकार का लक्ष्य पिछले साल के 31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 3.2 प्रतिशत की कमी लाने का था. कृषि विभाग को अभी तक प्राप्त हुए आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में 19.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई का काम पूरा हो गया है जो पिछले की समान अवधि की तुलना में 25 फीसदी अधिक है.

सर्दी की जल्दी शुरुआत और कीमत है प्रमुख कारण

राजस्थान सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि गेहूं और सरसों के रकबे में बढ़ोतरी के पीछे की मुख्य वजह सर्दी की जल्द शुरुआत है. बुवाई का काम दो सप्ताह में पूरा हो जाने की उम्मीद है और उसके बाद हमारे पास ज्यादा स्पष्ट आंकड़े मौजूद रहेंगे. सरसों के उत्पादन के मामले में राजस्थान नंबर एक राज्य है जबकि गेहूं में राज्य का नंबर पांचवां है.

दूसरी वजह यह है कीमत. फसल कटाई के वक्त इस बार किसानों को गेहूं का औसत भाव 1872 रुपए प्रति क्विंटल मिला है जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 1925 रुपए प्रति क्विंटल था. जबकि सरसों के लिए किसानों को एमएसपी से औसतन 35 से 40 प्रतिशत अधिक भाव मिला है.

चना की बात करें तो किसानों को औसत भाव 4990 रुपए प्रति क्विंटल मिला जबकि एमएसपी 5100 रुपए थी. फिलहाल तो राजस्थान की मंडियों में चना की कीमत 4633 रुपए है. यहीं कारण है कि किसान चना की जगह सरसों और गेहूं की अधिक रकबे मं बुवाई कर रहे हैं जबकि राजस्थान सरकार का लक्ष्य था कि चना के रकबे को पिछले साल के 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से बढ़ाकर 20 लाख हेक्टेयर किया जाए.