आज मार्गशीर्ष अमावस्या मनाई जा रही है. इसे अगहन अमावस्या के नाम से भी जाना जाना जाता है. इस दिन पितरों का तर्पण, स्नान और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान से पुण्यदायी फल प्राप्त होते हैं. वहीं इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है.
ऐसे में मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन स्नान करने के बाद विधिवत पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना चाहिए. इस दिन पितृ देव कीआरती भी अवश्य करनी चाहिए. मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पृत देवकी आरती करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. आइए पढ़ते हैं आरती.
पितृ देव की आरती
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड़ा तुम्हारी,
शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,
रख लेना लाज हमारी,
जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।
आप ही रक्षक आप ही दाता,
आप ही खेवनहारे,
मैं मूरख हूं कछु नहिं जानू,
आप ही हो रखवारे,
जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,
करने मेरी रखवारी,
हम सब जन हैं शरण आपकी,
है ये अरज गुजारी,
जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।
देश और परदेश सब जगह,
आप ही करो सहाई,
काम पड़े पर नाम आपके,
लगे बहुत सुखदाई,
जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।
भक्त सभी हैं शरण आपकी,
अपने सहित परिवार,
रक्षा करो आप ही सबकी,
रहूं मैं बारम्बार,
जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड़ा हू तुम्हारी,
शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,
रखियो लाज हमारी,
जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।



