क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसमें किडनी धीरे-धीरे अपना काम करना बंद करने लगती है और शरीर से टॉक्सिक तत्व बाहर निकालने की क्षमता घट जाती है. द लैंसेट में प्रकाशित Global Burden of Diseases 2023 स्टडी के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 788 मिलियन यानी 78 करोड़ लोग CKD से प्रभावित हैं. हर 10 में से 1 व्यक्ति को यह बीमारी है, लेकिन ज़्यादातर को इसका पता नहीं चलता. भारत में 138 मिलियन यानी 13.8 करोड़ लोग इससे जूझ रहे हैं, जिससे भारत CKD के मामलों में दूसरे स्थान पर है. यह बीमारी पिछले तीन दशकों में दोगुनी हो चुकी है.
लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, CKD के प्रमुख कारण हैं डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, खराब डाइट और प्रदूषण. लंबे समय तक शुगर और ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ा रहने से किडनी की नसें और फ़िल्टर धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं. साथ ही, धीरे-धीरे किडनी की क्षमता कम होती है और वह शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती. इसके शुरुआती लक्षण बहुत मामूली होते हैं, जैसे थकान, पैरों या चेहरे पर सूजन, भूख में कमी, पेशाब में झाग, या बार-बार पेशाब आना. अक्सर लोग इन लक्षणों को सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ जाती है.
ज्यादातर लोगों को CKD का पता क्यों नहीं चल पाता?
क्रॉनिक किडनी डिजीज को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि यह बीमारी बिना किसी खास लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. शुरुआती चरणों में किडनी में दर्द नहीं होता और व्यक्ति को सामान्य थकान, नींद की कमी या कमजोरी जैसी चीजें सामान्य लगती हैं. इसी वजह से लोग टेस्ट नहीं कराते और बीमारी अनजाने में बढ़ती रहती है.
दूसरा कारण है जागरूकता की कमी. ऐसे में लोग सोचते हैं कि किडनी की जांच सिर्फ तब जरूरी है जब कोई बड़ा लक्षण दिखे, जबकि हकीकत में ब्लड और यूरिन टेस्ट से शुरुआती स्टेज में ही CKD का पता लगाया जा सकता है.
इसके अलावा, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर वाले मरीज नियमित किडनी टेस्ट नहीं करवाते, जिससे धीरे-धीरे नुकसान होता जाता है. किडनी की 6070% क्षमता खत्म होने के बाद ही लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक इलाज कठिन हो जाता है यानी समस्या सिर्फ बीमारी की नहीं, बल्कि समय पर पहचान न हो पाने की भी है. यही वजह है कि लैंसेट स्टडी ने दुनियाभर में रूटीन किडनी स्क्रीनिंग की सलाह दी है ताकि लोग समय रहते सावधानी बरत सकें.
कैसे करें बचाव?
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की जांच कराएं.
संतुलित और कम नमक वाली डाइट लें.
पर्याप्त पानी पिएं और प्रोसेस्ड फूड से बचें.
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं.
अगर परिवार में किसी को किडनी की बीमारी है तो समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट करवाएं.
नियमित व्यायाम, वजन पर कंट्रोल और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं.



