आपने कई लोगों के घरों के बाहर एक भायनक सा चेहरा लगा देता होगा. ये चेहरा इसलिए लगाया जाता है, ताकि घर बुरी नजर से बचा रहे. ये चेहरा कीर्तिमुख नाम के राक्षस का है. कीर्तिमुख को ये वरदान मिला था कि वो बुरी नजर से बचाएगा. मान्यताओं के अनुसार, इस राक्षस का चेहरा घर के बाहर लटकाने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती.
माना जाता है कि ये नकारात्मक ऊर्जा को पहले ही निगल लेता है, तो चलिए जानते हैं कीर्तिमुख राक्षस की पौराणिक कथा कि आखिर ये राक्षस देवता कैसे बन गया और इसे कैसे बुरी नजर से बचाने का वरदान प्राप्त हुआ?
कीर्तिमुख की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ध्यान में लीन थे. उसी समय अपनी शक्तियों के अहंकार में चूर राहू ने शिव जी के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा को ग्रहण लगा दिया. ये देखकर महादेव को बहुत क्रोध आया. क्रोध में महादेव में अपनी तीसरी आंख खोल दी. उनके तीसरी आंख खोलने के बाद राहु को मारने के लिए कीर्तिमुख उत्पन्न हुआ. कीर्तिमुख का मुख सिंह की तरह था. उसकी आंख से आग बरस रही थी.
भगवान शिव ने उसको आदेश दिया कि वो राहु को खा जाए. इसके बाद राहु को अपनी गलती का एहसास हुआ वो तो भोलेनाथ में क्षमा प्रार्थना करने लगा. फिर महादेव ने उसको क्षमा कर दिया. ये सब देख कीर्तिमुख ने भगवान से कहा कि उसको भूख लगी है. क्योंकि उन्होंने उसको किसी को खाने के लिए उत्पन्न किया है. तब भगवान शिव ने उसे यूं ही कह दिया कि वो अपने शरीर को कहा जाए.
शिव जी के आदेश पर खुद को खाना शुरू कर दिया
भगवान शिव को ये नहीं लगा कि कीर्तिमुख इस आदेश का भी पालन करेगा, लेकिन उसने ऐसा किया. शिव जी के आदेश पर उसने खुद को ही खाना शुरु कर दिया. तब भगवान ने कीर्तिमुख को रोका और कहा कि उसका मुख यशस्वी है वो उसे न खाए. इस घटना के बाद से शिव जी ने उसे अपना सबसे प्रिय गण बना लिया. साथ ही शिव जी ने कीर्तिमुख को ये वरदान दिया कि वो जहां विराजमान हो जाएगा, नकारात्मकता वहां वास नहीं कर पाएगी.
कृतिमुख ऐसे बन गया देवता
बताया जाता है कि भगवान से वरदान पा लेने के बाद कीर्तिमुख का चेहरा शुभता, सुरक्षा और सकारात्मकता का प्रतीक बन गया. तभी से ऐसी मान्यता है कि जिस घर या दुकानों के बाहर कीर्तिमुख का चेहरा लटका होता है, वहां किसी भी नकारात्मक शक्ति का प्रवेश नहीं हो पाता. ये हर तरह की नकारात्मक शक्ति और उर्जा को खा जाता है.



