Vedant Samachar

डायबिटीज के मरीज और नींद का क्या है संबंध?…

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डायबिटीज एक क्रॉनिक मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें शरीर इंसुलिन हॉर्मोन का सही उपयोग नहीं कर पाता या फिर पर्याप्त इंसुलिन हॉर्मोन बना नहीं पाता. इससे ब्लड में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है और शरीर के सेल्स एनर्जी का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं. डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकार हैं, टाइप 1 और टाइप 2. टाइप 1 में शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज़ के इंसुलिन बनाने वाले सेल्स को ही नुकसान पहुंचा देती है. टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन के प्रति रेसिस्टेंट हो जाता है या फिर इंसुलिन का निर्माण कम हो जाता है. इसका कारण मोटापा, खराब लाइफस्टाइल, फैट जमा होना, अनहेल्दी खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, जेनेटिक्स और तनाव जैसे फैक्टर भी हैं.

डायबिटीज और नींद एक-दूसरे को सीधा प्रभावित करते हैं. हाई ब्लड शुगर होने पर रात में बार-बार प्यास लगना, डिहाइड्रेशन महसूस होना और बार-बार पेशाब जाना आम बात है, जिससे नींद बार-बार टूटती है. वहीं, शुगर अचानक कम होने पर बेचैनी, घबराहट, पसीना, दिल की धड़कन तेज होना और नींद टूट जाना भी होता है. रिसर्च बताती है कि जिन लोगों की नींद कम रहती है, उनमें एप्पेटाइट हॉर्मोन बदल जाते हैं, भूख बढ़ती है और वजन बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है, जो टाइप 2 डायबिटीज का बड़ा जोखिम है. यानी खराब नींद से शुगर कंट्रोल बिगड़ता है और अनकंट्रोल्ड शुगर नींद को भी नुकसान पहुंचाती है. इसी वजह से डायबिटीज मरीजों में स्लीप डिसऑर्डर काफी ज्यादा पाए जाते हैं.

डायबिटीज के मरीज और नींद का क्या है संबंध?
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डॉ. सुभाष गिरी बताते हैं कि डायबिटीज के कई मरीजों में Obstructive Sleep Apnea (OSA) पाया जाता है. OSA में सोते समय सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है और यह बार-बार होता है. इससे शरीर को पूरा ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, नींद टूटी हुई रहती है और दिन में थकान बनी रहती है. टाइप 2 डायबिटीज के लगभग आधे मरीजों में OSA देखने को मिल सकता है.

साथ ही, Restless Legs Syndrome (RLS) भी डायबिटीज मरीजों में ज्यादा देखा जाता है, खासकर तब जब नसों पर असर पड़ता है या शरीर में आयरन की कमी होती है. इसमें पैरों में झनझनाहट, जलन या लगातार बेचैनी महसूस होती है, जिससे नींद आ ही नहीं पाती.

इसके अलावा, इंसुलिन रेसिस्टेंस और हाई ब्लड शुगर के कारण तनाव हॉर्मोन भी बढ़ जाते हैं. यही वजह है कि कई डायबिटीज मरीजों में इंसोम्निया यानी नींद आने या नींद बनाए रखने में भी परेशानी हो जाती है. इन सभी समस्याओं से नींद की क्वॉलिटी खराब होती है और इसके बाद ग्लूकोज़ कंट्रोल भी बिगड़ने लगता है.

डायबिटीज में नींद का ध्यान कैसे रखें?
रात में भारी या देर रात भोजन न करें.

सोने-उठने का समय रोज एक जैसा रखें.

सोने से एक घंटा पहले फोन-लैपटॉप स्क्रीन से दूरी रखें.

कमरे को शांत और आरामदायक रखें.

जरूरत हो तो डॉक्टर से नींद से जुड़ी जांच जरूर करवाएं.

अच्छी नींद से शुगर कंट्रोल बेहतर होता है, और अच्छा शुगर कंट्रोल नींद को भी सुधारता है. यह दो-तरफा संबंध है.

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