Vedant Samachar

Kartik Purnima Aarti: कार्तिक पूर्णिमा पर जरूर करें यह विशेष आरती, नहीं होगी धन की कमी!

Vedant Samachar
2 Min Read

कार्तिक पूर्णिमा आज यानी 5 नवंबर को मनाई जा रही है और इसके बाद मार्गशीर्ष मास की शुरुआत हो जाती है. कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर ही देव दीपावली भी मनाई जाती है, जिसे देवताओं की दिवाली भी कहते हैं. देव दिवाली का काशी में विशेष महत्व होता है और इस दिन विष्णु जी संग भगवान शिव की उपासना की जाती है. वहीं, कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी पूजा को भी बेहद खास माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी माता की आरती किए बिना तुलसी पूजा अधूरी रह जाती है. ऐसे में आइए पढ़ते हैं तुलसी माता की आरती.

तुलसी जी की आरती (Tulsi Ji Ki Aarti Lyrics)
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता ।

सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।

मैय्या जय तुलसी माता।।

सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।

रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।

मैय्या जय तुलसी माता।।

बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या।

विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता।

मैय्या जय तुलसी माता।।

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित।

पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता।

मैय्या जय तुलसी माता।।

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।

मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता।

मैय्या जय तुलसी माता।।

हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी।

प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।

हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता।

मैय्या जय तुलसी माता।।

जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।

सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता॥

मैय्या जय तुलसी माता।।

तुलसी जी की पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए?
कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी की पूजा करते समय आप ॐ सुभद्राय नमः या महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आदि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते। जैसे मंत्रों का जाप कर सकते हैं. इसके अलावा, आप ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बोलकर तुलसी की परिक्रमा कर सकते हैं और पूजा के अंत में अपनी मनोकामनाएं कह सकते हैं.

Share This Article