सबूतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कोरबा,30अक्टूबर (वेदांत समाचार)। जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) कोरबा एक बार फिर विवादों में है। मृत व्यक्ति के नाम पर दर्ज वाहन का फर्जी ट्रांसफर किए जाने की शिकायत कई सप्ताह पहले दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया है। शिकायतों और दस्तावेजी प्रमाणों के बावजूद विभाग की चुप्पी ने सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, परिवहन कार्यालय में पदस्थ कुछ कर्मचारियों और एजेंटों की मिलीभगत से मृत व्यक्ति की गाड़ी को फर्जी तरीके से ट्रांसफर कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने डीटीओ विवेक सिन्हा सहित संबंधित कर्मचारियों — विकास ठाकुर और अतुल तिवारी — पर गंभीर आरोप लगाते हुए सभी सबूत विभाग को सौंपे। इसके बावजूद शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
शिकायतकर्ता ने डीटीओ को स्मरण पत्र देकर सात दिन के भीतर जांच की मांग की थी। लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि विभागीय अधिकारी शिकायत को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
राज्य सरकार भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन की बात कर रही है, वहीं निचले स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई दिख रही है। कोरबा के इस प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता के बजाय ‘प्रभाव और पहुँच’ का बोलबाला कायम है।
अब पुलिस अधीक्षक से होगी औपचारिक शिकायत
शिकायतकर्ता ने बताया कि वह अब पूरे प्रकरण की शिकायत कोरबा पुलिस अधीक्षक से करेंगे। डीटीओ विवेक सिन्हा, कथित एजेंट लालू राठौर तथा कर्मचारियों विकास ठाकुर सहित संबंधित सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।
अटैचमेंट नीति की भी उड़ रही धज्जियां
राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी कर रखे हैं कि किसी भी विभाग में कर्मचारियों का अटैचमेंट नहीं रहेगा और जो पहले से अटैच हैं उन्हें मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाए। बावजूद इसके परिवहन कार्यालय में कई कर्मचारी अब भी अटैचमेंट पर कार्यरत हैं, जिससे सरकारी निर्देशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। इस मुद्दे पर भी अलग से शिकायत तैयार की जा रही है।
जनता में गहराता अविश्वास
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कोरबा परिवहन कार्यालय में “सेटिंग सिस्टम” का बोलबाला है। अधिकारी और एजेंटों के बीच गहरी सांठगांठ के कारण हर शिकायत को दबा दिया जाता है। लोगों का यह भी कहना है कि जब दस्तावेजी सबूतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो आम जनता सरकार के न्याय तंत्र पर भरोसा कैसे करे?
राज्य के सुशासन पर प्रश्नचिह्न
छत्तीसगढ़ इस वर्ष अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र की ऐसी कार्यशैली जनता में निराशा पैदा कर रही है। जहां सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की बातें कर रही है, वहीं निचले स्तर पर ऐसी लापरवाहियां सुशासन की परिभाषा को धूमिल कर रही हैं।



