नई दिल्ली,26अक्टूबर । भारत के पड़ोसी बांग्लादेश की राजधानी ढाका में अमेरिकी स्पेशल फोर्स अधिकारी टेरेंस अर्वेल जैक्सन की रहस्यमय मौत ने पूरे दक्षिण एशिया में खुफिया हलचल मचा दी है। आर्गेनाइजर में छपी रिपोर्ट के अनुसार दावा किया जा रहा है कि यह मौत महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश नाकाम होने का नतीजा हो सकती है। हालांकि इन दावों की किसी भी सरकारी एजेंसी ने अब तक पुष्टि नहीं की है।
31 अगस्त की रात क्या हुआ था?
31 अगस्त को टेरेंस अर्वेल जैक्सन का शव ढाका के एक होटल रूम में मिला। बताया गया कि वह अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े थे और “सुरक्षा प्रशिक्षण मिशन” पर बांग्लादेश में तैनात थे। लेकिन रिपोर्टों का कहना है कि उनका असली मिशन कुछ और था, दक्षिण एशिया में भारत को निशाना बनाना।
CIA की सक्रियता पर बढ़े सवाल
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण एशिया में CIA की गतिविधियां तेज़ हुई हैं। पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के हालिया घटनाक्रमों के पीछे अमेरिकी दखल की संभावना पर पहले भी चर्चा हो चुकी है। अब जैक्सन की मौत ने इन शक़ों को और गहरा कर दिया है।
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क्या भारत था निशाने पर?
रिपोर्ट के अनुसार, जैक्सन को सतही तौर पर बांग्लादेश में सेंट मार्टिन द्वीप पर सेना प्रशिक्षण के लिए तैनात दिखाया गया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उसका असली मिशन भारत के भीतर और खासकर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ गुप्त कार्रवाई करना था। जैक्सन की मौत उसी दिन हुई जब पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में चीन के तियानजिन में थे। सम्मेलन के बाद, मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कार में 45 मिनट तक गुप्त बातचीत की। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दौरान हाई-प्रोफाइल एजेंडा और दक्षिण एशिया में चल रही खुफिया गतिविधियों पर चर्चा हुई।
मोदी-पुतिन की गुप्त बातचीत से जुड़ी कड़ी
मौत वाले दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन में शामिल थे। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उन्होंने करीब 45 मिनट तक कार में अकेले बातचीत की थी।
रिपोर्ट्स का दावा है कि उसी दौरान दोनों नेताओं ने एक गुप्त सुरक्षा खतरे पर चर्चा की, जिसे रूस और भारत की खुफिया एजेंसियों ने मिलकर नाकाम किया। उसी शाम जैक्सन ढाका में मृत पाए गए।
क्या ढाका था ऑपरेशन का केंद्र?
खुफिया सूत्रों का कहना है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA पिछले कुछ समय से बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में अपनी सक्रियता बढ़ा रही है। कई विश्लेषक मानते हैं कि भारत के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने या मोदी सरकार को दबाव में लाने के लिए यह नेटवर्क तैयार किया गया था। ढाका में अमेरिकी अधिकारी की मौत ने इन अटकलों को और तेज़ कर दिया है।
मोदी के बयान ने बढ़ाई चर्चा
2 सितंबर को दिल्ली लौटने के बाद पीएम मोदी ने सेमीकॉन सम्मेलन में कहा था: “क्या आप इसलिए ताली बजा रहे हैं क्योंकि मैं चीन गया था या इसलिए कि मैं वापस आया हूं?” विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री का यह वाक्य किसी गहरे संकेत से भरा हुआ था।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर छाया शक
इन आरोपों के बाद भारत-अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्तों में तनाव की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अमेरिकी दूतावास ने अब तक इस मामले पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है, वहीं भारत की ओर से भी आधिकारिक बयान का इंतज़ार है।



