अक्टूबर के महीने में रुपए ने कई महीनों के तेजी दिखाई दिया है. इसका कारण भी है. रुपए को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सपोर्ट मिला. विदेशी निवेशकों की वापसी से भी रुपए को सहारा मिला. शेयर बाजार में आई तेजी कारण भी रुपए ने अपने आपको संभाला. आरबीआई के सपोर्ट से रुपए में उछाल देखने को मिला. अमेरिका के साथ होने वाली संभावित ट्रेड डील पर बना पॉजिटिव माहौल भी रुपए को सपोर्ट दे गया. ये वो तमाम बातें रही जो रुपए को फुल सपोर्ट देने के लिए काफी थी.
अगर बात शुक्रवार की करें तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली और शेयर बाजार में गिरावट के बाद भी रुपए में तेजी देखने को मिली. खास बात तो ये है कि कच्चे तेल की कीमतों गिरावट और ट्रेड डील का बेहतर माहौल बनने के कारण रुपए में तेजी आई. अक्टूबर के महीने में रुपए में डॉलर के मुकाबले में 1 रुपए की तेजी देखने को मिल चुकी है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर 30 सितंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले में किस लेवल पर था, अब मौजूदा समय में किस लेवल पर आ गया है.
रुपए में फिर आई तेजी
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 9 पैसे बढ़कर 87.79 पर पहुंच गया. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आशावाद के चलते यह मजबूती आई. हालांकि, विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी ने तेज बढ़त को रोक दिया. इंटरबैंक-बैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 87.78 पर खुला और फिर मामूली गिरावट के साथ 87.79 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से 9 पैसे कम है. गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे बढ़कर 87.88 पर बंद हुआ. फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक कल (गुरुवार) फिर से 87.95 पर मौजूद था, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि रुपया 88.00 के स्तर को पार न करे और रुपया अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की आशावाद के साथ अपने चरम पर बंद हुआ. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ वैश्विक धारणा मिली-जुली बनी हुई है.
अक्टूबर में आई एक रुपए की तेजी
वहीं दूसरी ओर अक्टूबर महीने की बात करें तो रुपए में डॉलर के मुकाबले में एक रुपए की तेजी देखने को मिल चुकी है. आंकड़ों को देखें तो रुपया पिछले महीने के आखिरी कारोबारी दिन 88.80 के लेवल पर था, जो 1.01 रुपए मौजूदा समय में 87.79 के लेवल पर आ गया है. इसका मतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में 1.14 फीसदी की तेजी देखने को मिल चुकी है. भंसाली ने कहा कि दो रूसी तेल कंपनियों के निर्यात (जो कुल विश्व तेल उत्पादन का 5 प्रतिशत से अधिक है) पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण गुरुवार को 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के बाद, ब्रेंट तेल की कीमतें 65.63 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहीं और जून 2025 के बाद से अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त के लिए तैयार हैं. कीमतें साप्ताहिक आधार पर 7 प्रतिशत अधिक हैं, जो लगभग 4 महीनों में सबसे महत्वपूर्ण साप्ताहिक उछालों में से एक को दर्शाता है. वैसे रुपए पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिलने वाला है. आने वाले दिनों में ऑयल की सप्लाई में इजाफा होगा, तो कीमतें और कम हो जाएगी.
बाजार में गिरावट
इस बीच, छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती का आकलन करने वाला डॉलर इंडेक्स 0.08 प्रतिशत बढ़कर 99.01 पर कारोबार कर रहा था. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 65.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 153.18 अंक गिरकर 84,403.22 पर आ गया, जबकि निफ्टी 51.1 अंक गिरकर 25,840.30 पर आ गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को 1,165.94 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी बेची.



