अवैध प्लॉटिंग और लापरवाही पर उठे सवाल – vedantsamachar.in

अवैध प्लॉटिंग और लापरवाही पर उठे सवाल

  • नगर एवं ग्राम निवेश विभाग में नियमों की हो रही है अनदेखी


जांजगीर-चांपा 2 मई 2026। जिले में नगर तथा ग्राम निवेश (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। उप संचालक कार्यालय के जिम्मे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना है, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है।


जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बिना अनुमति अवैध प्लॉटिंग और नियम विरुद्ध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। आरोप है कि इन मामलों में विभाग की निगरानी या तो बेहद कमजोर है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर कृषि भूमि को बिना डायवर्जन के ही प्लॉट में काटकर बेच दिया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को भविष्य में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

जानकारों के अनुसार, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग का मूल उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सुव्यवस्थित विकास, आधारभूत सुविधाओं का समुचित प्रबंधन और अनधिकृत निर्माण पर नियंत्रण रखना होता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में इन जिम्मेदारियों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर बहुत कम दिखाई देता है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


जानिए, क्या है विभाग की जिम्मेदारी
शहर और गांवों का सुनियोजित विकास प्लान तैयार करना. अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनियों पर नियंत्रण रखना, भवन निर्माण और भूमि उपयोग में नियमों का पालन सुनिश्चित करना. मास्टर प्लान के अनुसार विकास कार्यों की निगरानी करना, जिले में जमीन पर क्या हो रहा है? बिना अनुमति कृषि भूमि की प्लॉटिंग. कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव. खरीदारों को कानूनी जोखिम का खतरा. विभागीय कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित. पहले भी उठ चुके हैं सवाल जिले में यह पहली बार नहीं है जब नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की भूमिका पर सवाल उठे हैं। पूर्व में भी अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के मामलों में कार्रवाई को लेकर विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते रहे हैं। जिले में यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।