वॉशिंगटन,18अक्टूबर : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आक्रामक व्यापार नीति अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 नवंबर 2025 से अमेरिका में आयात किए जाने वाले मध्यम और भारी ट्रकों तथा उनके कल-पुर्जों पर 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जाएगा। वहीं आयातित बसों पर 10% शुल्क लागू किया जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में लिया गया फैसला
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस टैरिफ का उद्देश्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और घरेलू ऑटोमोटिव उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिका में ट्रक निर्माण की निर्भरता अन्य देशों पर होना जोखिम भरा है।
यह फैसला विशेष रूप से मेक्सिको के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह अमेरिका को मध्यम और भारी ट्रकों का सबसे बड़ा निर्यातक है। कनाडा, जापान, जर्मनी और फिनलैंड जैसे सहयोगी देशों से भी इस क्षेत्र में आयात होता है, जिन्हें इस फैसले से आर्थिक चोट पहुंच सकती है।
किस-किस पर पड़ेगा असर?
नए टैरिफ नियमों के तहत कैटेगरी 3 से 8 तक के सभी ट्रक शामिल किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
बड़े पिकअप ट्रक
मूविंग और कार्गो ट्रक
डंप ट्रक
18-पहिया ट्रैक्टर ट्रक
इस नीति से अमेरिकी निर्माता कंपनियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से राहत मिल सकती है। पीटरबिल्ट, केनवर्थ और फ्रेटलाइनर जैसी कंपनियों को सीधे तौर पर इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
क्रेडिट योजना से राहत की कोशिश
ट्रंप प्रशासन ने कंपनियों को राहत देने के लिए एक नई 3.75% टैक्स क्रेडिट योजना भी पेश की है। यह क्रेडिट अमेरिका में असेंबल किए गए ट्रकों, इंजनों और पुर्जों पर लागू होगी, ताकि आयात पर लगे टैरिफ से होने वाली लागत की भरपाई की जा सके। यह योजना 2030 तक लागू रहेगी।
वाणिज्य विभाग ने पहले ही संकेत दिए थे कि 2026 तक पात्र अमेरिकी असेंबल्ड वाहनों के लिए टैरिफ ऑफसेट दिया जाएगा, जो बाद में घटाकर 2.5% किया जाएगा।
चैंबर ऑफ कॉमर्स और सीनेटरों की प्रतिक्रिया
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि मेक्सिको, कनाडा और जापान जैसे देश अमेरिका के भरोसेमंद साझेदार हैं, और उन्हें इस तरह के टैरिफ से निशाना बनाना ठीक नहीं है।



