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धान खरीदी में घोटाले की तैयारी अभी से शुरू, खरीदी केंद्र में घोटालेबाज के बेटे की ही कर दी गई ताजपोशी, सहकारिता विभाग की खुल रही है पोल

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खरसिया,14अक्टूबर (वेदांत समाचार) । प्रदेश सरकार ने अभी किसानों से धान खरीदी की घोषणा ही की है और इस बीच प्रदेश में धान खरीदी करने वाली समितियों में घोटाला करने की पृष्ठभूमि तैयार होने लगी है। सरकारी अमला भी इस कार्य में पूरा सहयोग कर रहा है। ताजा मामला खरसिया विकासखंड की तुरेकेला आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्या. का है, जहां प्रबंधक पद की नई नियुक्ति ने पूरे सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

बाप की जगह बेटे को बनाया प्रबंधक
दरअसल, कुछ ही महीने पहले यही समिति करोड़ों रुपये के धान घोटाले में डूब गई थी। जांच हुई, एफआईआर दर्ज कराया गया, और तत्कालीन प्रबंधक तिहारु राम जायसवाल को पद से बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन अब जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। उसी तिहारु राम जायसवाल के बेटे, डमरु जायसवाल को इस समिति का नया प्रबंधक बना दिया गया है..!

इस तरह हुआ धान का घोटाला
वर्ष 2024-25 की धान खरीदी के दौरान समिति में भारी गड़बड़ी सामने आई थी। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि समिति से 22,389 बोरी (8955.55 क्विंटल) धान कम था। करीब करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा 9,867 नए बारदाने और 6,376 पुराने मिलर्स बारदाने का हेरफेर भी सामने आया। इतनी बड़ी अनियमितता के बाद तिहारु राम जायसवाल को बर्खास्त किया गया और थाना खरसिया में अपराध दर्ज कराया गया।

अब बेटे की एंट्री से किसान हैरान
अब घोटाले की वही कहानी एक नए किरदार के साथ दोहराई जा रही है। आरोपी प्रबंधक का बेटा, डमरु जायसवाल, समिति की नई कुर्सी पर बैठा दिया गया है। किसानों का कहना है, “जिसने संस्था को नुकसान पहुंचाया, उसके बेटे को उसी कुर्सी पर बैठाना जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।” लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि डमरु जायसवाल के पास न तो पर्याप्त अनुभव है और न ही पात्रता। फिर भी यह नियुक्ति कैसे हो गई?

भाजयुमो ने विरोध में सौंपा ज्ञापन
मामला अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है।भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के अध्यक्ष रविंद्र जीवन गबेल ने इस नियुक्ति को “कानूनी और नैतिक रूप से गलत” बताया है।उन्होंने एसडीओ खरसिया को ज्ञापन सौंपते हुए कहा “जब तक पूर्व प्रबंधक से गबन की राशि की वसूली नहीं हो जाती, तब तक उसके परिजन को किसी भी पद पर बैठाना कानून और नैतिकता दोनों के खिलाफ है।”

ग्रामीणों का सवाल – ‘किसकी शह पर हो रही है यह नियुक्ति?’
सहकारी समितियों में इस तरह की नियुक्ति सहकारिता विभाग के आदेश से होती है। गांव में इस फैसले को लेकर गुस्सा उफान पर है। ग्रामीणों ने कहा कि विभाग के पास घोटाले की रिपोर्ट और एफआईआर दोनों मौजूद हैं, फिर भी इस तरह की नियुक्ति यह दिखाती है कि “कहीं न कहीं ऊपर से संरक्षण मिल रहा है।” उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि नियुक्ति रद्द नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों और भाजयुमो पदाधिकारियों ने उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
चपले समिति में भी दोहराई कहानी

सूत्र बताते हैं कि यह के ग्राम चपले समिति में भी कुछ ऐसा ही खेल चल रहा है। वहां भी पुराने मामलों में संलिप्त लोगों को दोबारा मौका देने की तैयारी हो रही है।लोगों का कहना है कि अगर सरकार सच में “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” चाहती है, तो इन विवादित नियुक्तियों को तुरंत रद्द कर पारदर्शिता का उदाहरण पेश करे।

अब देखना यह है कि शासन इस “घोटाले के वारिस” की नियुक्ति को बरकरार रखता है या किसानों की आवाज को सुनता है।

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