[metaslider id="114975"] [metaslider id="114976"]

CJI के साथ अभद्र व्यवहार पर सख्त कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने रद्द की राकेश किशोर की सदस्यता…

CJI के साथ अभद्र व्यवहार पर सख्त कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने रद्द की राकेश किशोर की सदस्यता…

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की कार्यकारिणी समिति ने एक अहम और कड़ा फैसला लेते हुए अधिवक्ता राकेश किशोर की अस्थायी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। यह निर्णय उस घटना के बाद लिया गया जिसमें अधिवक्ता किशोर ने 6 अक्टूबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की अदालत में अशोभनीय व्यवहार किया था।

कार्यकारिणी ने अपनी आपात बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया और कहा कि इस तरह की हरकत न्यायपालिका की गरिमा, पेशे की मर्यादा और बार-बेंच के संबंधों पर सीधा प्रहार है।

यह कृत्य पेशेवर आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन-एससीबीए

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपने प्रस्ताव में कहा कि अधिवक्ता राकेश किशोर, जो दिल्ली बार काउंसिल में नामांकन संख्या D/1647/2009 से पंजीकृत हैं, ने अदालत में जो आचरण किया, वह न केवल गंभीर अनुशासनहीनता है बल्कि यह न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायालय की गरिमा पर सीधा हमला है। समिति ने इसे अत्यंत निंदनीय, अव्यवस्थित और असंयमित व्यवहार बताते हुए कहा कि किसी भी वकील से इस तरह के रवैये की उम्मीद नहीं की जा सकती। वकील अदालत के अधिकारी होते हैं और उन्हें मर्यादा तथा सम्मान बनाए रखना चाहिए।


तत्काल सदस्यता समाप्त, प्रवेश पास और कार्ड भी रद्द

कार्यकारिणी समिति ने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता किशोर की अस्थायी सदस्यता क्रमांक K-01029/RES (दिनांक 27 जुलाई 2011) को तुरंत प्रभाव से समाप्त किया जाता है। इसके साथ ही उनका सदस्यता कार्ड रद्द और जब्त किया जाएगा। इसके अलावा, एससीबीए ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार-जनरल को पत्र लिखने का निर्णय लिया है ताकि अधिवक्ता किशोर को जारी प्रॉक्सिमिटी एक्सेस कार्ड (अदालत में प्रवेश पास) को भी तुरंत रद्द किया जा सके। समिति ने निर्देश दिया कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट बार के सभी सदस्यों और संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जाए ताकि भविष्य में किसी भ्रम की स्थिति न रहे।


न्यायपालिका की गरिमा सर्वोपरि- एससीबीए का संदेश

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपने संकल्प में कहा कि वह न्यायपालिका की गरिमा, अधिवक्ता समुदाय के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि मानती है। संकल्प में लिखा गया है कि एससीबीए न्यायपालिका की गरिमा, अनुशासन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। बार और बेंच के बीच आपसी विश्वास ही न्याय प्रणाली की नींव है। किसी एक व्यक्ति की अनुचित हरकत इस विश्वास को कमजोर नहीं कर सकती। एसोसिएशन ने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे पेशे की मर्यादा और आचार संहिता का पालन करें और किसी भी परिस्थिति में न्यायालय की कार्यवाही में बाधा या अनादर न करें।

सीजेआई की कोर्ट में हुआ था विवाद

जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की कोर्ट में अधिवक्ता राकेश किशोर ने कथित रूप से अनुशासनहीन और असंयमित व्यवहार किया था। इस घटना के बाद से बार और बेंच दोनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इसके बाद ऑल इंडिया बार एसोसिएशन (AIBA) ने भी दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की यह कार्रवाई उस घटना के बाद की दूसरी औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई है।

[metaslider id="133"]

Vedant samachar