बिलासपुर,07 अक्टूबर 2025। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए अपोलो हॉस्पिटल के चार डॉक्टरों को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत में पेश चार्जशीट को निरस्त कर दिया।
मामला वर्ष 2016 का है, जब अपोलो हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों की शिकायत पर सरकंडा थाना में डॉक्टरों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने धारा 304A (गैर इरादतन हत्या) और धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था।
घटना का विवरण
दयालबंद निवासी एक युवक को 25 दिसंबर 2016 को गंभीर हालत में अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मरीज को मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर था और अगले दिन 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद विसरा जांच में किसी भी तरह के जहरीले पदार्थ या सल्फास के अवशेष नहीं पाए गए थे।
इस मामले में परिजनों की शिकायत पर डॉ. सुनील कुमार केडिया, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. राजीव लोचन भांजा और डॉ. मनोज कुमार राय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। चारों डॉक्टरों ने सीनियर एडवोकेट सुनील ओटवानी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
मेडिकल बोर्ड ने दी थी क्लीन चिट
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में पहले सिम्स मेडिकल कॉलेज और बाद में राज्य मेडिकल बोर्ड ने जांच की थी। कार्डियोलॉजिस्ट सहित पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 2023 में अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि डॉक्टरों की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है।
मेडिको लीगल एक्सपर्ट की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ केस
इसके बावजूद पुलिस ने एक मेडिको लीगल एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। रिपोर्ट में मृत्युपूर्व बयान दर्ज न करने और राइस ट्यूब को संरक्षित न करने का उल्लेख था, किंतु यह नहीं बताया गया था कि इन तथ्यों का मरीज की मृत्यु से सीधा संबंध था।
हाईकोर्ट ने कहा – मामला न्यायसंगत नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि केस न्यायसंगत नहीं है और इसमें डॉक्टरों की किसी भी प्रकार की आपराधिक लापरवाही सिद्ध नहीं होती। इसलिए अदालत ने एफआईआर एवं चार्जशीट दोनों को निरस्त कर दिया।



