नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में पुल टूटने और कई जगहों पर लैंडस्लाइड से हड़कंप मच गया है। इस आपदा में 14 लोगों की मौत हो गई और कई लोग लापता हैं। अधिकारियों की मानें तो मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। आपदा की वजह भारी बारिश को बताया जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश का तांडव देखने को मिल रहा है। इससे नदियां पूरे उफान पर हैं। इसी बीच दार्जिलिंग और सिक्किम के बीच बना एक पुल अचानक धराशायी हो गया।
जहां एक तरफ पुल टूटने से दार्जिलिंग और सिक्किम के बीच का कनेक्शन टूट गया है, तो वहीं सड़क धंसने से दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी के बीच बनी रोड भी ब्लॉक हो गई है।
कई इलाकों में बाढ़ के हालात
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी और कूचबिहार में भारी बारिश से जनजीवन तहस-नहस हो गया है। कई इलाकों में पानी जमा होने से बाढ़ के हालात बन गए हैं। इस भीषण आपदा के मद्देनजर दार्जिलिंग और सिक्किम के कई पर्यटन स्थलों को भी बंद कर दिया गया है।
कई नेशनल हाईवे बंद
भारी बारिश के कारण नेशनल हाईवे 10 पर भूस्खलन देखने को मिला है। चित्रे, सेल्फी दारा समेत कई जगहों पर लैंडस्लाइड से रास्ता बंद हो गया है। इसके अलावा नेशनल हाईवे 717ए पर भी कई भूस्खलन हुए हैं। तीस्ता बाजार इलाके में बाढ़ के हालात बन गए हैं, जिसके कारण कलिम्पोंग से दार्जिलिंग तक का रूट बंद कर दिया गया है।
कोरोनेशन ब्रिज टूटने से सिक्किम और दार्जिलिंग को जोड़ने वाला रास्ता भी बंद हो गया है। पुलिस ने लोगों को कलिम्पोंग जिले से होकर गुजरने की सलाह दी है।
पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा-
उत्तरी बंगाल में भारी बारिश के कारण दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सेओंग प्रभावित हुए हैं। भूस्खलन और बाढ़ के कारण सिलीगुड़ी, तराई और दुआर्स से पूरी तरह संपर्क टूट गया है।
मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
मौसम विभाग ने सिक्किम के 6 जिलों समेत कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। IMD ने सिर्फ आज के लिए 2 रेड वॉर्निंग दी थीं। इस दौरान 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के साथ-साथ गरज चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई थी।
मौसम विभाग के अनुसार, 7 अक्तूबर तक सिक्किम समेत पश्चिम बंगाल के पहाड़ी राज्यों में मौसम खराब रहने की संभावना है। भारी बारिश से भूटान में फ्लैश फ्लड्स की स्थिति बन सकती है, जिसका असर पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में देखने को मिलेगा।



