नई दिल्ली,29 सितम्बर । प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शहीद हुए भारतीय सैनिकों को सोमवार को इज़राइल के हाइफा शहर में श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर हाइफा के मेयर योना याहाव ने कहा कि शहर की स्कूल की इतिहास पुस्तकों में बदलाव किया जा रहा है, ताकि बच्चों को यह सही जानकारी मिल सके कि हाइफा को ओटोमन शासन से ब्रिटिश नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों ने आज़ाद कराया था।
मेयर याहाव ने समारोह में कहा, “मैं यहीं पैदा हुआ और यहीं से पढ़ाई की, लेकिन हमें हमेशा बताया गया कि शहर को ब्रिटिश ने मुक्त कराया। बाद में इतिहास के एक जानकार ने मुझे शोध के दस्तावेज दिखाए और सच्चाई सामने आई कि यह काम भारतीय सैनिकों ने किया था।”
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यह कार्यक्रम हाइफा में स्थित बलिदानी भारतीय सैनिकों के कब्रिस्तान में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग उनकी वीरता को याद करने पहुंचे।
इतिहासकारों के अनुसार, 1918 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय घुड़सवार रेजिमेंट ने तलवार और भाले लेकर माउंट कार्मेल की कठिन ढलानों से ओटोमन सेना को पीछे धकेलते हुए हाइफा को मुक्त कराया था। इसे युद्ध का आखिरी बड़ा घुड़सवार अभियान माना जाता है।
मेयर याहाव ने 2009 में भी इसी स्थल पर ऐलान किया था कि स्कूल की किताबों में यह इतिहास शामिल होगा। अब यह युवाओं के बीच एक स्थापित तथ्य के रूप में दर्ज हो रहा है।
भारतीय सेना हर साल 23 सितंबर को हाइफा दिवस मनाती है। इस दिन 1918 में हाइफा को मुक्त कराने वाली तीन भारतीय घुड़सवार रेजिमेंट – मैसूर, हैदराबाद और जोधपुर लांसर्स – को सम्मानित किया जाता है। हर साल भारतीय मिशन और हाइफा नगर निगम संयुक्त रूप से इन बहादुर सैनिकों की शहादत को नमन करते हैं।



