Vedant Samachar

Post Office की स्कीम : महिलाओं के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश का विकल्प

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आज के समय में महिलाएं ही नहीं, हर परिवार अपने पैसों को सुरक्षित और भरोसेमंद जगह पर लगाना चाहता है। घर की जिम्मेदारियां निभाते-निभाते ज्यादातर महिलाएं चाहती हैं कि छोटी-छोटी बचत करके भविष्य के लिए एक बड़ा और सुरक्षित फंड तैयार करें। ऐसे में पोस्ट ऑफिस की स्कीमें एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती हैं, क्योंकि ये सरकार द्वारा चलाई जाती हैं और इसमें निवेश किया गया पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

क्यों पोस्ट ऑफिस की स्कीम बेहतर होती है
पोस्ट ऑफिस की स्कीमें देशभर में आसानी से उपलब्ध हैं और इनका संचालन सरकार करती है, इसलिए यहां निवेश करने में कोई जोखिम नहीं होता। इन योजनाओं में ब्याज दर तय रहती है, जो बैंक की तरह समय-समय पर सरकार द्वारा अपडेट की जाती है। मार्केट के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। महिलाएं अपने नाम से खाता खोलकर बिना किसी परेशानी के बचत शुरू कर सकती हैं। यही कारण है कि यह योजना सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहने वालों के लिए बेहद उपयोगी है।

हर महीने 9 हजार जमा करने पर कितनी रकम मिलेगी
अगर कोई महिला 10 साल तक हर महीने 9,000 रुपये पोस्ट ऑफिस की किसी योजना में जमा करती है, तो वह धीरे-धीरे एक बड़ा फंड बना सकती है। इस निवेश पर हर साल ब्याज भी जुड़ता है और कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। नीचे दिए गए विवरण के अनुसार, 10 साल तक हर महीने 9,000 रुपये जमा करने पर आपका कुल निवेश ₹10,80,000 होगा। इस पर आपको ₹4,57,692 रुपये का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी पर आपको ₹15,37,692 रुपये मिलेंगे।

छोटी बचत से बड़ा फंड कैसे बनेगा
अक्सर लोग सोचते हैं कि कम पैसे से ज्यादा फायदा नहीं मिलता, लेकिन पोस्ट ऑफिस की स्कीम में धीरे-धीरे जमा करने से बड़ा फंड बन सकता है। हर महीने 9,000 रुपये अलग रखकर महिलाएं और परिवार बिना किसी परेशानी के 10 साल में 15 लाख रुपये से ज्यादा जमा कर सकते हैं। यह रकम बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर बनाने, या किसी अन्य जरूरत में काम आ सकती है।

मासिक निवेशब्याज दर (वार्षिक)समय अवधिकुल निवेशअनुमानित ब्याज / रिटर्नकुल रकम (मैच्योरिटी)
₹9,0006.7%10 वर्ष₹10,80,000₹4,57,692₹15,37,692

ब्याज और कंपाउंडिंग का फायदा
हर महीने जमा किए गए पैसे पर जब ब्याज जुड़ता है, तो वह भी आपके मूलधन में शामिल होकर अगली बार और ज्यादा ब्याज बनाता है। इसे कंपाउंडिंग कहते हैं। यही वजह है कि लंबे समय में छोटे-छोटे निवेश भी बड़े फंड में बदल जाते हैं। पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में ब्याज दर स्थिर रहती है, इसलिए आपको पहले से पता होता है कि कितनी रकम बनेगी और उसी के हिसाब से आप अपनी प्लानिंग कर सकती हैं।

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