शिमला,25 सितम्बर : जिला शिमला में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए बुधवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सतर्कता समिति और सार्वजनिक वितरण समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत चल रही योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि जिले में अब तक 66,230 परिवारों और 2,69,425 लोगों को चयनित किया जा चुका है। उपायुक्त ने कहा कि विभाग सक्रियता से काम कर रहा है और उचित मूल्य की दुकानों के जरिए आम जनता को बड़ा लाभ मिल रहा है। वर्तमान में जिले में 623 उचित मूल्य की दुकानें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 347 सहकारी सभाएं, 229 व्यक्तिगत और शेष महिला मंडलों, पंचायतों व निगम द्वारा चल रही हैं।
बैठक के दौरान यह खुलासा हुआ कि जिले में 55,839 राशन कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें 92 मृतक लाभार्थी, 591 ऐसे लोग जिनकी आयु 100 वर्ष से अधिक दर्ज है, 18 वर्ष से कम उम्र के राशन कार्ड मुखिया, 4,083 साइलेंट कार्ड, 429 डुप्लीकेट कार्ड और 43,957 भूमि धारक शामिल हैं, जिनके पास ढाई एकड़ से अधिक जमीन है। इसके अलावा 890 ऐसे लाभार्थी हैं जिनकी वार्षिक आय 6 लाख से अधिक है। कुछ लाभार्थियों के पास वाहन, जीएसटीएन या वे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में निदेशक के तौर पर पंजीकृत भी पाए गए हैं।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि सभी संदिग्ध कार्डों की जांच कर केवल पात्र लोगों को ही योजनाओं में शामिल किया जाएगा। बैठक में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे महीने में कम से कम 5 सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण करें और खाने की गुणवत्ता, बच्चों के बैठने की व्यवस्था व किचन की सफ ाई का जायजा लें। जून से अगस्त 2025 तक हुए 1257 निरीक्षणों में 12 दुकानों में अनियमितताएं सामने आईं और 20,250 रुपए जुर्माना वसूला गया। बैठक में कई नए गांवों में उचित मूल्य की दुकानें खोलने को भी मंजूरी दी गई.



