इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगने वाला है। यह एक खास और रोचक खगोलीय घटना है। रविवार को लगने वाला यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। इसका वैज्ञानिक, ज्योतिष और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्व है। वैज्ञानिक दृष्टि से, जब चंद्रमा, धरती और सूर्य के बीच आ जाता है, तब सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाती। इसे ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है। आइये जानते इसे विस्तार से…
ग्रहण कहां दिखाई देगा
यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण गोलार्ध के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, और सूर्य की रोशनी कुछ समय के लिए बाधित हो जाती है। इस बार यह ग्रहण न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और फिजी में देखा जा सकेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें
सूर्य ग्रहण को सनातन धर्म में विशेष महत्व दिया गया है। इसे लेकर कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं
ग्रहण के समय पवित्र नदी में स्नान करें।
इसके बाद सूर्य देव की पूजा और अर्चना करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार यह उपाय सभी बुरे प्रभावों को दूर करने में मदद करता है।
सूतक काल क्या है और क्या न करें
-सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है।
सूतक काल में ये बातें ध्यान रखें
-पूजा-पाठ और शुभ कार्य न करें।
-केवल भगवान के नाम का जप करें।
–भोजन का सेवन न करें।
-सूर्य ग्रहण खत्म होते ही सूतक काल भी खत्म हो जाता है। इस बार, भारत में सूतक काल नहीं मान्य होगा, क्योंकि ग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा।
धार्मिक महत्व
भारत में सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व बहुत है। इस बार सूर्य ग्रहण पितृ विसर्जनी अमावस्या के दिन लग रहा है। ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा। चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव नहीं माना जाएगा।
सूर्य ग्रहण की टाइमिंग
भारतीय समयानुसार शुरुआत: रात 10:59 बजे (21 सितंबर) अधिकतम चरण: रात 1:11 बजे (22 सितंबर), समाप्ति: सुबह 3:23 बजे (22 सितंबर) रहेगा।
भारत में नहीं दिखाई देगा
21 सितंबर को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण न दिखने के कारण सूतक भी नहीं लगेगा। इसलिए भारत में किसी प्रकार का ज्योतिषीय या धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा।



