Vedant Samachar

सेना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुफ्त चिकित्सा और पशु सेवा शिविर लगाए

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अखनूर,20 सितम्बर: जम्मू-कश्मीर में हाल ही में आई भारी बारिश और बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों के तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF) और भारतीय सेना ने मानवीय प्रयासों की मिसाल पेश की है। बीएसएफ की 134वीं बटालियन ने अखनूर जिले के राख खारून गांव में ‘बाढ़ राहत कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन किया।

BSF का पशु चिकित्सा शिविर
यह शिविर 2IC अजय भट्ट, डीसी जिग्मेथ अंगचोक, डीसी अमर सिंह यादव, डॉ. लूना राम और अखनूर स्थित पशु चिकित्सा अस्पताल की डॉ. रेणु जामवाल की उपस्थिति में आयोजित किया गया। 227 बीमार पालतू पशुओं की जांच की गई औक 44 पशुपालकों को लाभ मिला। वहीं, बीमार या घायल पशुओं को निःशुल्क सर्जरी और दवाइयां प्रदान की गईं। शिविर में बीएसएफ और सरकारी पशु चिकित्सकों की टीम तैनात रही। सिद्धरवन, गरखल, जजियाल, राख खारून, फत्तू कोटली, राजपुरा और दब सूडान जैसे आसपास के गांवों के लोग लाभान्वित हुए।

बीएसएफ ने बताया कि जिन ग्रामीणों के लिए शिविर में पहुंचना संभव नहीं था, उनके लिए घर-घर जाकर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुओं की सेहत का संरक्षण और किसानों की आजीविका की सुरक्षा करना है, जो बाढ़ के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है।

सेना का ‘ऑपरेशन सद्भावना’: डोडा जिले में मेडिकल कैंप
इसी बीच, भारतीय सेना की 26 राष्ट्रीय राइफल्स इकाई ने डोडा ज़िले के भलेसा इलाके में ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत पांच दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया है। अब तक 100 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा चुका है। मुफ़्त दवाइयां, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की निरंतर उपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने वालों में बाढ़ से प्रभावित परिवार प्रमुख शामिल रहे। गंडोह उप-ज़िला अस्पताल की डॉ. सलमा ने कहा, “ऐसे शिविर बार-बार आयोजित होने चाहिए ताकि लोगों को समय पर इलाज मिल सके।”

जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति
पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर में लगातार भारी बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। नदियाँ उफान पर हैं और सीमावर्ती गांवों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। इन आपात हालात में बीएसएफ और सेना का यह मानवीय प्रयास, राहत और पुनर्वास के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। बताते चलें कि, बीएसएफ और भारतीय सेना द्वारा उठाए गए ये कदम न सिर्फ राहत कार्यों का एक अहम हिस्सा हैं, बल्कि यह संदेश भी देते हैं कि सुरक्षा बल सिर्फ सीमाओं की रक्षा नहीं करते, बल्कि आपदा की घड़ी में देशवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।

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