आज के समय में युवाओं में आंखों से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. यह चिंता का विषय है क्योंकि आंखों की समस्याएं पहले बड़े उम्र वाले लोगों में देखी जाती थीं, अब ये कहीं कम उम्र में सामने आ रही हैं. कई रिसर्च यह बताती कि भारत में हर पांच में से एक बच्चा किसी न किसी आंखों की समस्या से जूझ रहा है. तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और डिजिटल डिवाइज पर बढ़ती निर्भरता ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. अगर यही स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में आंखों की बीमारियां देश के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकती हैं. यही कारण है कि इस विषय पर समय रहते कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है.
आंखों की बीमारियों के पीछे सबसे बड़ा कारण युवाओं में बढ़ता स्क्रीन टाइम है. आज स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट न केवल शिक्षा बल्कि मनोरंजन और सोशल मीडिया का भी मुख्य साधन बन चुके हैं. ऑनलाइन पढ़ाई, वेब सीरीज और वीडियो गेम्स ने बच्चों और युवाओं का स्क्रीन पर बिताया समय कई गुना बढ़ा दिया है. इसके अलावा, बाहर खेलने की आदतें लगातार कम हो रही हैं, जिससे आंखों को प्राकृतिक रोशनी और आराम का मौका नहीं मिल पाता है. लगातार स्क्रीन पर देखते रहने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं और डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या तेजी से बढ़ती है. नींद पूरी न होना, खराब खानपान और आंखों की सही देखभाल न करना भी इस समस्या को गंभीर बना देता है.
आंखों की किन बीमारियों का बढ़ रहा खतरा?
शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स में मेडिकल डायरेक्टर डॉ. कमल बी कपूर बताते हैं कि युवाओं में आंखों से जुड़ी जिन बीमारियों का खतरा सबसे अधिक बढ़ रहा है, उनमें डिजिटल आई स्ट्रेन, आंखों का सूखापन, सिरदर्द, आंखों की लाली और धुंधला दिखाई देना विशेष हैं. पहले जिन समस्याओं का सामना लोग 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद करते थे, अब वे बच्चों और कॉलेज जाने वाले छात्रों में आम होती जा रही हैं. मायोपिया यानी नजदीक का चश्मा भी तेजी से बढ़ रहा है और कई बच्चे कम उम्र में ही चश्मा लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं.
सबसे अधिक खतरा उन बच्चों और युवाओं को है जो लंबे समय तक लगातार स्क्रीन पर देखते रहते हैं और जिनकी लाइफस्टाइल में फिजिकल एक्टिविटी की कमी होती है. कमजोर रोशनी में पढ़ाई करना, देर रात तक जागना और हेल्दी डाइट की कमी भी इस खतरे को बढ़ा देती है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में आंखों की समस्याएं एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन सकती हैं.
कैसे करें बचाव
हर 20 मिनट पर 20 सेकेंड के लिए 20 फीट दूर देखें.
बच्चों और युवाओं के स्क्रीन टाइम को सीमित करें.
पर्याप्त नींद लें और समय पर सोने-जागने की आदत डालें.
हरी सब्ज़ियां, फल और विटामिन-ए युक्त डाइट का सेवन करें.
बाहर खेलकूद और प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने की आदत डालें.
आंखों में लगातार जलन, धुंधलापन या सिरदर्द हो तो तुरंत आई डॉक्टर से संपर्क करें.



