Vedant Samachar

धर्मांतरण पर प्रहार :  70 लोगों ने की घर वापसी, विधायक भावना बोहरा ने पैर पखारकर किया स्वागत

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पंडरिया विधानसभा में धर्मांतरण रोकने और आदिवासी समाज को उनकी जड़ों से जोड़ने का एक बड़ा अभियान सफल हुआ है। विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में वनांचल क्षेत्र के 70 से अधिक जनजाति परिवारों ने अपने मूल धर्म में लौटकर घर वापसी की। सेवा दिवस के अवसर पर कुई-कुकदुर स्थित विशेष पिछड़ी जनजाति छात्रावास मैदान में आयोजित संस्कृति गौरव सम्मान समारोह में इन परिवारों का पैर पखारकर स्वागत किया गया। झूमर, बोहिल, आगरपानी, नेउर और छिंदीडीह जैसे गांवों से लौटे इन लोगों ने विधायक भावना बोहरा के समर्पण को सराहा।

विधायक भावना बोहरा ने कहा कि घर वापसी केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और विरासत को सहेजने का महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग प्रलोभनों के जरिए आदिवासी समाज को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार उनकी इस साजिश को कभी सफल नहीं होने देगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में धर्मांतरण रोकने के लिए 1968 के धर्म स्वतंत्रता अधिनियम में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसमें अवैध धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की नीतियाँ देश की मातृशक्ति, युवाशक्ति, सैन्यशक्ति और आदिवासी समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आदिवासी समाज के लिए पीएम आवास, निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा, शैक्षणिक सुविधाएँ, स्वास्थ्य पैथ लैब और सड़कों जैसे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंडरिया विधानसभा में जनजाति परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में भाजपा नेताओं—राजेंद्र चंद्रवंशी, हरीश लुनिया, बसंत वटिया—सहित कई पदाधिकारी और क्षेत्रवासियों ने भाग लिया। सभी ने विधायक भावना बोहरा के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह पहल जनजाति समाज की संस्कृति को सुरक्षित रखने की दिशा में मिसाल बनेगी। इस मौके पर प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत जागरूकता अभियान को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

यह आयोजन न केवल धर्मांतरण पर प्रहार है, बल्कि छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित करने का एक बड़ा संदेश भी है। यह साबित करता है कि समाज को जागरूक कर, नेतृत्व की पहल से सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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