Vedant Samachar

माली में आतंकियों का ईंधन ट्रकों पर कहर: जलाए सैकड़ों टैंकर, अल-कायदा से है खास कनेक्शन…

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पश्चिमी अफ्रीकी देश माली इन दिनों आतंकवाद के नए रूप से जूझ रहा है। अल-कायदा से जुड़े कट्टरपंथी संगठन जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन (JNIM) ने हाल ही में ईंधन सप्लाई को रोकने की साजिश के तहत ट्रकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में करीब 100 से अधिक फ्यूल टैंकर आतंकियों द्वारा जला दिए गए हैं, जिससे देश में गंभीर ईंधन संकट मंडराने लगा है।

ईंधन ट्रकों पर सीधा हमला

पड़ोसी देश सेनेगल की सीमा के पास स्थित कायेस शहर के आसपास इन हमलों की सबसे अधिक घटनाएं सामने आई हैं। JNIM ने दो सप्ताह पहले ही चेतावनी जारी की थी कि माली में ईंधन लाने वाले ट्रक ड्राइवरों को निशाना बनाया जाएगा। इसके तुरंत बाद कई टैंकरों पर हमले शुरू हो गए। वायरल वीडियो में कई ट्रकों को जलते हुए देखा गया, जिनमें कई पूरी तरह राख हो गए।

सेना पर भी हमला, हालात बेहद संवेदनशील

माली की सेना ने हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि बामाको की ओर जा रहे टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर रहे जवानों पर भी हमला हुआ है। हालांकि, अभी तक हताहतों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। सेना की मौजूदगी के बावजूद ट्रक ड्राइवरों ने अपनी गाड़ियाँ सीमा के पास खड़ी कर दी हैं और वे हालात के सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।

अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

माली की राजधानी बामाको और अन्य प्रमुख शहरों में अब ईंधन की भारी कमी का खतरा बढ़ गया है। देश की अर्थव्यवस्था आयातित फ्यूल पर निर्भर करती है, और रोजाना करीब 100 से अधिक टैंकर सेनेगल से माली में प्रवेश करते हैं। लेकिन इन आतंकी हमलों और धमकियों के कारण यह सप्लाई चैन लगभग ठप हो चुकी है।

एक स्थानीय फ्यूल सप्लायर ने बताया, “स्थिति यही रही तो एक हफ्ते के भीतर बामाको में पेट्रोल और डीज़ल मिलना मुश्किल हो जाएगा, और जो थोड़ा-बहुत बचेगा, उसकी कीमतें आसमान छू सकती हैं।”

JNIM का मकसद: सैन्य सरकार की नींव हिलाना

विशेषज्ञों का मानना है कि ये हमले केवल ईंधन सप्लाई को रोकने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका उद्देश्य माली की सैन्य सरकार को कमजोर करना है। सुरक्षा और राजनीतिक जोखिमों पर नज़र रखने वाली संस्था कंट्रोल रिस्क्स की विश्लेषक बेवर्ली ओचिएंग ने कहा, “आतंकी चाहते हैं कि आम लोग सरकार से नाराज़ हों। ईंधन की कमी और महंगाई से जनता की नाखुशी बढ़ेगी, जिससे सरकार की पकड़ कमजोर होगी।”

माली सरकार की प्रतिक्रिया और चुनौती

प्रधानमंत्री मेजर जनरल अब्दुलाये माइगा ने इस पूरी घटना को “गंभीर और दुखद” बताया है। लेकिन इस संकट से निपटने की कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आई है। सरकार और सेना दोनों के सामने अब एक बड़ी चुनौती है देश को आतंकियों की जकड़ से निकालना और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना।

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