शरीर को सीधा खड़ा रहने के लिए सबसे जरूरी है हमारी स्पाइन, जिसे रीढ़ की हड्डी कहा जाता है को हेल्दी रखें. अगर रीढ़ की हड्डी हेल्दी रहती है तो शरीर में लचीलापन, संतुलन और ताकत बनी रहती है. अपने आस-पास आपने कई लोगों को ऑफिस में देखा होगा जिनको लगातार बैठने में दिक्कत होती है. उन्हें रीढ़ की हड्डि का दर्द रहता है. ये गलत पॉश्चर के कारण होता है. रीढ़ की हड्डी के दर्द में कमर दर्द, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क और स्पॉन्डिलाइटिस जैसी दिक्कतें हो जाती है. ऐसे में समझिए कैसे योगासन रीढ़ की हड्डी के दर्द में राहत दे सकता है.
रीढ़ की बीमारियों के पीछे कई कारण होते है. जिस तरह से लोगों की काम करने की आदत है लंबे समय कर एक जगह पर बैठे रहने का है. लैपटॉप पर काम करते समय गर्दन का लगातार झुके रहना, इन सब आदतों से रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है. इस तरह की दिनचर्चा में अगर व्यायाम शामिल न हो तो रीढ़ की हड्डी पर ओर अधिक खतरा बढ़ जाता है. अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि कमर में खिंचाव रहता है, ज़्यादा देर बैठने पर पीठ भारी हो जाती है. ये सब रीढ़ की दिक्कतों के मेजर लक्षण होते हैं.
रीढ़ से संबंधित बीमारियां क्यों होती हैं?
पोषण की कमी, खासकर कैल्शियम और विटामिन D की कमी हड्डियों को कमजोर बनाती है. इसके साथ ही उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घिसना और डिस्क का कमजोर होना भी एक सामान्य कारण है. कई बार चोट या एक्सीडेंट से भी रीढ़ की समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा, तनाव और मानसिक दबाव भी रीढ़ की मांसपेशियों में अकड़न और दर्द का कारण बन सकते हैं.
रीढ़ की बीमारियों में कौन से योग फायदेमंद हैं?
कुछ आसान आसन रोज़ 15 से 20 मिनट करने से बड़ा फर्क पड़ सकता है.
1- भुजंगासन (Cobra Pose)-
रीढ़ को लचीला बनाने को लिए और पीठ की जकड़न को कम करने के लिए ये आसन किया जाता है. इसे करने से कमर और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे ब्लड फ्लो अच्छा रहता है. रीढ़ की हड्डी का दर्द इस योग से कम होता है.
2- मार्जारी आसन (Cat-Cow Pose)-
रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बनाए रखने के लिए cat cow pose वाला योगासन किया जाता है. सांल लेने के साथ कमर को झुकाने और उठाने के प्रोसेस में रीढ़ की अकड़न दूर होती है. बैक पेन भी इस पोज से दूर होता है.
Cat-Cow Pose
मार्जारी आसन
3- शशांकासन (Child Pose)–
तनाव और थकान दूर करने वाला ये आसन रीढ़ के साथ-साथ मानसिक शांति भी देता है. इसे करने से पीठ की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है. जिस तरह से बच्चे इस पॉजिशन में रहते हैं उसी तरह से आसन किया जाता है.
Child Pose
शशांकासन
4- सेतुबंधासन (Bridge Pose)-
ये आसन कमर की मांसपेशियों को मज़बूत करता है और लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली जकड़न को कम करता है. यह रीढ़ की प्राकृतिक बनावट को बनाए रखने में मददगार है. इसमें कमर को उठाकर कुछ देर इस पॉजिशन में रहकर वापिस से रेस्ट मोड में चले जाएं.
Bridge Pose
सेतुबंधासन
5- पश्चिमोत्तानासन (Forward Bend)-
यह आसन रीढ़, पैरों और जांघों को खींचता है. नियमित अभ्यास से नसों में तनाव कम होता है और रीढ़ की लचीलापन बढ़ती है. अगर आपकी स्पाइन में अधिक दर्द है तो खुद से ये आसन धीरे -धीरे ही करें. नहीं तो दर्द बढ़ भी सकता है.
Forward Bend
पश्चिमोत्तानासन
योग करने का सबसे अच्छा समय
लोग अक्सर पूछते हैं योग कब करें? सुबह या शाम? जवाब है सुबह सबसे बेहतर है. सुबह की ताज़ा हवा और खाली पेट योगासन शरीर को ऊर्जा से भर देते हैं. लेकिन अगर सुबह समय न मिले तो शाम को भी कर सकते हैं. बस ध्यान रहे कि खाना खाने के बाद तुरंत योग न करें. कम से कम 2 से 3 घंटे का गैप होना चाहिए.
खाने-पीने में क्या परहेज करना चाहिए?
मान लीजिए आप रोज़ योग करते हैं लेकिन डाइट में तैलीय और मसालेदार खाना भरा है, तो फायदा आधा ही मिलेगा. रीढ़ को मज़बूत रखना है तो कुछ आदतों में बदलाव जरुरी है जैसे-
ज़्यादा तेल-मसाले, पैकेज्ड फूड और फिज़ी ड्रिंक से दूरी बनाइए.
चीनी और नमक की अधिकता हड्डियों को कमजोर करती है, इन्हें सीमित रखें.
शराब और धूम्रपान से हड्डियों की सेहत सबसे ज़्यादा बिगड़ती है इन्हें छोड़ना ही बेहतर है.
डाइट में दूध, दही, हरी सब्ज़ियां, दालें, बादाम और अखरोट जैसे पौष्टिक चीज़ें शामिल करें.
हड्डियों में दर्द है या जकड़न है तो कोशिश करें दिन में धूप लें. ये विटामिन का सोर्स है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है.



