नई दिल्ली,15 सितंबर : एशिया कप 2025 के छठे मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को सात विकेट से हराकर एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवा लिया. लेकिन मैच के बाद बड़ा विवाद देखने को मिला, भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी टीम के साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया. इस घटना ने क्रिकेट जगत में बहस छेड़ दी है. क्या यह खेल भावना के खिलाफ है? और क्या भारत को इसके लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की ओर से कोई सजा का सामना करना पड़ सकता है?
हाथ ना मिलाने पर खड़ा हुआ बवाल
14 सितंबर को खेले गए इस मैच में भारत ने पाकिस्तान के दिए गए टारगेट का पीछा करते हुए शानदार प्रदर्शन किया. कप्तान सूर्यकुमार यादव ने इस जीत को अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के शिकार लोगों को समर्पित किया, जिसमें 26 निर्दोष भारतीयों की जान चली गई थी. उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों को भी नमन किया. लेकिन पाकिस्तानी टीम ने टीम इंडिया के इस व्यवहार को गंभीरता से लिया. पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मैनेजर नवेद अकरम चीमा ने मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट के पास शिकायत दर्ज की, इसे ‘खेल की भावना के खिलाफ’ बताया. पीसीबी का कहना है कि यह घटना क्रिकेट की परंपराओं को ठेस पहुंचाती है.
टीम इंडिया को मिलेगी सजा?
अब सवाल उठता है कि क्या आईसीसी इस मामले को गंभीरता से लेगी? आईसीसी की आचार संहिता के मुताबिक, धारा 2.1.1 में ‘खेल की भावना के विपरीत आचरण’ को स्तर-1 का उल्लंघन माना जाता है. यह नियम उन छोटी-मोटी घटनाओं पर लागू होता है जो बाकी स्पेसिफिक नियमों में कवर न हों. इसमें खेल के प्रति सम्मान और उसकी पारंपरिक मूल्यों का पालन शामिल है. अगर कोई व्यवहार खेल को बदनाम करने वाला पाया जाता है, तो वह भी इसी कैटेगरी में आ सकता है. हालांकि, आखिरी फैसला मैच रेफरी और आईसीसी पर निर्भर करता है.
अगर आईसीसी भारतीय खिलाड़ियों पर यह आरोप साबित मान लेती है, सजा के तौर पर सबसे हल्की सजा एक आधिकारिक फटकार हो सकती है. इसके अलावा, खिलाड़ी की मैच फीस का कुछ प्रतिशत तक काटा जा सकता है. साथ ही, एक या दो डिमेरिट पॉइंट्स भी दिए जा सकते हैं, जो भविष्य के उल्लंघनों में भारी पड़ सकते हैं. लेकिन कि ऐसी घटनाओं पर सजा मिलना ना के बराबर है.



