Vedant Samachar

भारत का बड़ा बैंकिंग प्लान, 2047 तक टॉप-20 में शामिल होंगे दो बैंक!

Vedant Samachar
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भारत दुनिया के बैंकिंग सेक्टर में अपनी मजूबती को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. इसी क्रम में देश का अगला टारगेट है कि 2047 तक देश के कम से कम दो पब्लिक सेक्टर बैंक दुनिया के टॉप 20 PSB में शामिल हों, जो कि विकसित भारत के विजन के साथ मेल खाता है. अभी मौजूदा समय में सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और HDFC बैंक ही एसेट्स के आधार पर टॉप 100 ग्लोबल लेंडर्स की लिस्ट में हैं.

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को शुरू हुए दो दिन के PSB मंथन कॉन्फ्रेंस में पब्लिक सेक्टर बैंकों में कॉरपोरेट गवर्नेंस को स्ट्रॉन्ग करना, कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर करना, और मॉडर्नाइजेशन के जरिए उन्हें ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव बनाना मेन इश्यूज थे. एजेंडा में साइबर सिक्योरिटी, वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन, रिस्क मैनेजमेंट, और पर्सनल बैंकिंग जैसे टॉपिक्स भी शामिल थे.

मामले से जुड़े अधिकारी ने ग्लोबल अनसर्टेनिटी का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा मकसद पब्लिक बैंकों को फ्यूचर-रेडी बनाना और उनकी कैपेसिटी बढ़ाते हुए सिस्टमैटिकली ग्रोथ करना है. बेहतर ऑटोनॉमी और नेक्स्ट लेवल की ग्रोथ पर भी बात हो रही है. RBI के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. और चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन उन सीनियर अफसरों में थे, जिन्होंने शुक्रवार को सेशन्स को अड्रेस किया. बैंकरों ने घटते हुए करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट (CASA) रेशियो और इसे इम्प्रूव करने की जरूरत पर डिस्कस किया था.

MSME लोन
रिपोर्ट के मुताबिक, एग्रीकल्चर और माइक्रो, स्मॉल, मीडियम एंटरप्राइजेज जैसे प्रायोरिटी सेक्टर्स में लोन ग्रोथ को बूस्ट करने की जरूरत भी एक टॉपिक था. जुलाई 2025 में लोन ग्रोथ स्लो रही, नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 13.7% से घटकर 9.9% हो गई. केयरएज रेटिंग्स के रिसर्च नोट के मुताबिक, इंडस्ट्रियल लोन डिमांड वीक रही और बड़े इंडस्ट्रीज को लोन देने में 1% से भी कम ग्रोथ हुई. पब्लिक बैंकों ने अपने फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में जबरदस्त इम्प्रूवमेंट किया है. मार्च 2021 में उनका ग्रॉस NPA 9.11% से घटकर 2.58% हो गया. इसी पीरियड में उनका नेट प्रॉफिट 1.04 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया और डिविडेंड पेमेंट 20,964 करोड़ रुपये से बढ़कर 34,990 करोड़ रुपये हो गया.

पिछला PSB मंथन 2022 में हुआ था, जिसके बाद गवर्नमेंट ने बैंकों से 3 साल का बिजनेस स्ट्रैटेजी रोडमैप तैयार करने को कहा था. साथ ही सुझाव दिया था कि बैंक एक-दूसरे के साथ कोलैबोरेशन की पॉसिबिलिटीज तलाशें, जिसमें बड़े बैंक अपनी बेस्ट प्रैक्टिसेज छोटे बैंकों के साथ शेयर करें और उन एरियाज में गाइड करें जहां ज्यादा एक्सपर्टीज की जरूरत है. वित्त वर्ष 2026 के रिफॉर्म एजेंडे, EASErise के तहत, PSB का फोकस रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम्स को स्ट्रॉन्ग करने, इकोनॉमिक शॉक्स को हैंडल करने की कैपेसिटी बढ़ाने और फाइनेंशियल स्टैबिलिटी बनाए रखने पर होगा.

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