Vedant Samachar

क्या कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स कम कर सकती है होम्योपैथी?

Vedant Samachar
4 Min Read

कीमोथेरेपी कैंसर का एक इलाज है, जिसमें दवाओं के जरिए शरीर के कैंसर सेल्स नष्ट किए जाते हैं. इसका उद्देश्य कैंसर की बढ़त रोकना और बीमार सेल्स को खत्म करना होता है. यह उन मरीजों के लिए सलाह दी जाती है जिनके शरीर में ट्यूमर या कैंसर फैल चुका हो. कीमोथेरेपी केवल विशेषज्ञ डॉक्टर यानी ऑनकोलॉजिस्ट के निर्देशन में ही दी जाती है. इसे ओरल दवा, इंजेक्शन या IV ड्रिप के जरिए दिया जा सकता है. मरीज की उम्र, कैंसर का प्रकार और स्टेज देखकर ट्रीटमेंट प्लान तय किया जाता है. कभी यह सर्जरी या रेडिएशन से पहले दी जाती है, कभी बाद में. इसे जीवन बचाने वाला इलाज माना जाता है. हालांकि, इसके साथ कई साइड इफेक्ट्स भी जुड़े होते हैं, जो मरीज की सहनशक्ति और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करते हैं.

कीमोथेरेपी के दौरान मरीज थकान, कमजोरी और एनर्जी की कमी महसूस कर सकते हैं. इसके अलावा मतली, उल्टी और खाने में रुचि कम होना आम है. कई मरीजों को मुंह और गले में घाव, त्वचा और नाखूनों में बदलाव या जलन महसूस होती है. बाल झड़ना, इम्यूनिटी में कमी और बेचैनी भी देखने को मिलती है. साइड इफेक्ट्स की गंभीरता मरीज की उम्र, शरीर की सहनशक्ति और ली जा रही दवाओं पर निर्भर करती है. कभी-कभी यह सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्या भी बन सकती है. इसलिए मरीज के लिए सपॉर्टिव केयर जैसे उपाय अपनाना जरूरी है, ताकि उसका जीवन आरामदायक रहे और इलाज सही ढंग से असर करे. ऐसे में यह जानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स कम करने के लिए होम्योपैथिक दवाओं का खाना शुरू करे तो क्या इससे कुछ फायदा होगा?

क्या कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स कम कर सकती है होम्योपैथी?
होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. मंजू सिंह ने बताया कि होम्योपैथी कैंसर का इलाज नहीं करती और इसे कन्वेंशनल कैंसर ट्रीटमेंट की जगह नहीं लिया जा सकता. कन्वेंशनल ट्रीटमेंट का मतलब है ऐसा इलाज जो विज्ञान और मेडिकल रिसर्च पर आधारित हो, जैसे कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी. हालांकि, इलाज के साथ मिलकर काम करने वाले सेटअप में होम्योपैथी मरीज की मदद और आराम के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.

अध्ययन और मरीजों के अनुभव बताते हैं कि होम्योपैथिक दवाओं से कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स जैसे थकान, मतली, मुंह और त्वचा के घाव, बेचैनी आदि में राहत मिल सकती है. ट्रेन्ड होम्योपैथिक प्रेक्टिशनर की निगरानी में, यह मरीज की आराम की स्थिति, एनर्जी और मानसिक हालात सुधारने में मदद करती है. यह पूरे शरीर और मन के लिए सपोर्ट देती है और मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाती है.

डॉ. मंजू बताती हैं कि WHO भी पारंपरिक और वैकल्पिक दवाओं को कैंसर इलाज में जोड़ने की कोशिश कर रहा है. भारत में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) की लोकप्रियता बढ़ रही है. दुनियाभर में लगभग 30-40% कैंसर मरीज अपने मुख्य इलाज के साथ होम्योपैथी या अन्य सपोर्टिव थेरेपी भी लेते हैं, ताकि उनका स्वास्थ्य और जीवन बेहतर रहे.

इन चीजों का ध्यान रखें
होम्योपैथिक दवाएं सिर्फ लक्षण कम करने और पूरे शरीर-मस्तिष्क के आराम के लिए होती हैं.

केवल ट्रेन्ड और लाइसेंस्ड डॉक्टर से ही दवा लें.

इसे कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी जैसे मुख्य इलाज के साथ ही इस्तेमाल करें.

यह मतली, थकान, घाव और बेचैनी जैसी परेशानियों को कम करने में मदद करती हैं.

यह मरीज के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद करती हैं.

Share This Article