Vedant Samachar

अगस्त में इतनी बढ़ गई महंगाई, खाने-पीने की चीजें महंगी होने का दिखा असर

Vedant Samachar
2 Min Read

भारत की खुदरा महंगाई (Retail Inflation) जुलाई के आठ साल के न्यूनतम स्तर 1.55% से बढ़कर अगस्त में 2.07% हो गई. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी हाई बेस इफेक्ट के असर के कम होने की वजह से हुई है. बेस इफेक्ट, जिसने पिछले कुछ महीनों में महंगाई को कई सालों के न्यूनतम स्तर पर बनाए रखा था, अगस्त में कमजोर पड़ गया. इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आई, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की टोकरी का लगभग आधा हिस्सा होती हैं.

रॉयटर्स के 40 अर्थशास्त्रियों के सर्वे में अनुमान लगाया गया था कि अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 2.10% तक पहुंच जाएगी. यह लगातार सातवां महीना है जब महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है. खाद्य महंगाई, जो CPI टोकरी का लगभग आधा हिस्सा है, जुलाई के -1.76% से बढ़कर अगस्त में -0.69% हो गई.

क्यों बढ़ी महंगाई?
महंगाई बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से सब्जियों, मांस और मछली, तेल, अंडे, और पर्सनल केयर के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी का योगदान रहा. इससे साफ होता है कि जब खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते हैं तो सीधे तौर पर परिवारों के बजट पर असर पड़ता है. सब्जी, मांस, तेल, और अंडे जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के महंगे होने से खाने-पीने का खर्चा बढ़ जाता है.

ग्रामीण और शहरी इलाकों में महंगाई का फर्क
ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर अगस्त में 1.69% रही, जो जुलाई की 1.18% से बढ़ी है. वहीं, शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर 2.47% तक पहुंच गई, जो जुलाई के 2.10% से ज्यादा है. खाद्य महंगाई की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में यह -0.70% और शहरों में -0.58% रही.

अगस्त में आवास महंगाई थोड़ी कम होकर 3.09% पर आ गई, जबकि शिक्षा महंगाई 3.60% और स्वास्थ्य महंगाई 4.40% पर बनी रही. वहीं परिवहन और संचार के खर्चे में भी कमी आई है. फ्यूल और लाइट इनफ्लेशन दर भी घटकर 2.43% रह गया.

Share This Article