अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की युद्ध क्षमता को आर्थिक तौर पर कमजोर करने के लिए एक नया वैश्विक दबाव अभियान शुरू किया है। इस बार रूस से तेल खरीदने वाले दो सबसे बड़े देश भारत और चीन निशाना है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि G7 देश इन दोनों पर 50% से 100% तक का टैरिफ लगाएं, ताकि उन्हें रूसी तेल खरीदने से रोका जा सके।
रूस से तेल खरीद बना ‘टारगेट’
एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि चीन और भारत द्वारा खरीदा गया रूसी तेल, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहा है और यूक्रेन युद्ध को लंबा खींच रहा है। अमेरिकी ट्रेज़री विभाग के प्रवक्ता ने कहा: “रूसी तेल से पुतिन को जो पैसा मिल रहा है, उससे यूक्रेनी लोगों की हत्या हो रही है। जब युद्ध खत्म होगा, तब ये टैरिफ भी हटाए जाएंगे।”
G7 में होगी टैरिफ प्रस्ताव पर चर्चा
इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को G7 देशों के वित्त मंत्रियों की एक वीडियो बैठक होगी। कनाडा, जो इस साल G7 की अध्यक्षता कर रहा है, ने पुष्टि की है कि बैठक का मुख्य एजेंडा रूस पर अतिरिक्त दबाव बनाने के “आगे के कदम” होंगे। कनाडाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, “हम उन सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं जो रूस को अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के लिए बाध्य करें।”
“पीस एंड प्रॉस्पेरिटी” का हिस्सा है प्रस्ताव
व्हाइट हाउस के अनुसार यह कदम “Peace and Prosperity Administration” की रणनीति का हिस्सा है। एक नई योजना जिसे ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेन में युद्ध खत्म कराने और वैश्विक स्थिरता लाने के लिए लागू किया है। इस नीति के तहत अमेरिका चाहता है कि सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि रूस से व्यापारिक रूप से जुड़े साझेदार देशों को भी दवाब में लाया जाए।
EU के भीतर मतभेद
हालांकि यूरोपीय संघ (EU) इस रणनीति को लेकर संदेहपूर्ण है। ब्रसेल्स में उच्च पदस्थ अधिकारियों के अनुसार, “भारत और चीन जैसे व्यापारिक दिग्गजों पर भारी टैरिफ लगाने से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है। साथ ही, उनके पलटवार की भी आशंका है।” EU फिलहाल 2027 तक रूसी ऊर्जा से पूर्ण रूप से मुक्ति की अपनी योजना को ही प्राथमिकता देना चाहता है, जिसमें दीर्घकालिक प्रतिबंध और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की खोज शामिल है।
भारत और चीन की प्रतिक्रिया का इंतजार
भारत और चीन की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों ने G7 से एकतरफा आर्थिक दंड से बचने की अपील की है। भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला करेगा, जबकि चीन बार-बार अमेरिकी नीति की आलोचना कर चुका है।



