पित्त की थैली में पथरी होना बढ़ती उम्र की बीमारी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है. अब यह समस्या बच्चों में भी तेजी से दिखाई देने लगी है. हाल के वर्षों में देशभर के अस्पतालों और क्लीनिकों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसने डॉक्टरों को चिंतित कर दिया है.भारतीय शिशु रोग अकादमी (IAP) ने हाल के सालों में पेट दर्द की वजह से अस्पताल में भर्ती किए गए बच्चों पर एक स्टडी की थी. इसमें पता चला है कि हर 200 बच्चों में से लगभग 1 बच्चे को पित्त की थैली में पथरी थी.
शहरी इलाकों में बच्चों के खानपान और लाइफस्टाइल में तेजी से बदलाव आ रहा है. लगातार फास्ट फूड और मीठी चीजों का सेवन बच्चों में कोलेस्ट्रॉल और फैट बढ़ा देता है, जिससे पित्त की पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा मोटापा भी एक बड़ा कारण है. डॉक्टर इस बात पर जोर दे रहे हैं कि समय रहते बच्चों पर ध्यान देना जरूरी है. ऐसा न करने से यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती है.
6 साल तक के बच्चों को भी हो रही पथरी
गुरुग्राम के मेदांता-द मेडिसिटी अस्पताल में बाल शल्य चिकित्सा एवं बाल मूत्रविज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. संदीप कुमार सिन्हा ने बताया कि 6 साल तक के बच्चों को भी पित्त की थैली में पथरी देखी जा रही है. यह एक चिंता का कारण है. कई बार यह बीमारी लंबे समय तक पता ही नहीं चलती क्योंकि बच्चों के लक्षण नहीं दिखते हैं. अक्सर माता-पिता पेट दर्द की सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि पेट में लगातार दर्द पित्त की पथरी का लक्षण हो सकता है. ऐसे मामलों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके.
एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार ने कहा कि बच्चों में पित्त की थैली में पथरी बनना एक गंभीर समस्या बन सकती है. इतनी कम उम्र में पथरी होना अच्छे संकेत नहीं है. ऐसे में बचाव की जरूरत है.कई मामलों में दवाओं और खानपान में बदलाव से स्थिति संभाली जा सकती है, लेकिन अगर पित्ताशय में सूजन है तो सर्जरी करने पड़ती है.
बच्चे के शरीर में अगर पथरी है तो क्या लक्षण दिखते हैं?
पेट दर्द
मतली
उल्टी
पाचन गड़बड़ी
जिन बच्चों में लक्षण नहीं दिखते, उनमें यह अक्सर अल्ट्रासाउंड के दौरान किसी और वजह से जांच करते समय सामने आता है.
किन बातों का रखें ध्यान?
बच्चों को फल और सब्जियां खिलाएं
जंक फूड न दें या बिलकुल कम
बच्चों का स्क्रीन टाइम घटाएं.
उनको फिजिकल एक्टिविटी करने दें.
पेट दर्द या पाचन समस्या को नजरअंदाज न करें
समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें.



