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Mannu Kya Karegga Review: ‘वेक अप सिड’ जैसा फील, क्या व्योम यादव की फिल्म जीत पाएगी दिल?

Mannu Kya Karegga Review: ‘वेक अप सिड’ जैसा फील, क्या व्योम यादव की फिल्म जीत पाएगी दिल?

मुंबई : जिंदगी में कई बार ऐसा मोड़ आता है, जब सब कुछ होते हुए भी दिमाग में एक ही सवाल घूमता है, ‘अब क्या करें?’ अगर आप भी इसी Gen-Z वाले कन्फ्यूजन में हैं तो बॉलीवुड की एक नई फिल्म आई है, जिसका नाम भी यही है- ‘मन्नू क्या करेगा?’. ये फिल्म देखने के बाद क्या आपके सवाल का जवाब मिल जाएगा या आप पहले से भी ज्यादा उलझ जाएंगे, ये पता करने के लिए आपको ये रिव्यू पढ़ना होगा.

कहानी
फिल्म की कहानी एक ऐसे बिंदास और पॉपुलर लड़के की है, जिसे लोग प्यार से मन्नू बुलाते हैं. मन्नू (व्योम यादव) के पास सब कुछ है- दोस्त, टैलेंट और एक मस्त कॉलेज लाइफ, लेकिन बस एक चीज़ की कमी है- उसे ये नहीं पता कि लाइफ में करना क्या है. मन्नू की जिंदगी में ट्विस्ट तब आता है जब उसकी मुलाकात जिया (साची बिंद्रा) से होती है. जिया, दिल्ली यूनिवर्सिटी से देहरादून आई है. वो एक ऐसी लड़की है, जिसके पास अपने फ्यूचर को लेकर हर चीज का प्लान है. वो हार्वर्ड-स्टैनफोर्ड जाने के सपने देखती है और मन्नू को अपना ‘अधूरा’ प्लान लगती है.

फिर कहानी में एंट्री होती है एक ‘जुनूनी’ प्यार की. मन्नू जिया को इम्प्रेस करने के लिए एक स्टार्टअप शुरू करता है, जिसका नाम है ‘नथिंग’ (Nothing). नाम सुनकर ही आप समझ गए होंगे कि इस स्टार्टअप का हाल क्या होता होगा! बस यही ‘नथिंग’ वाली कहानी मन्नू की लाइफ में तबाही लाती है, आगे क्या होता है? ये जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर ‘मन्नू क्या? करेगा’ देखनी होगी.

जानें कैसी है फिल्म
फिल्म का नाम, स्टारकास्ट और ट्रेलर देखने के बाद वैसे तो फिल्म से कोई ज्यादा उम्मीदें ही नहीं थी. लेकिन ‘मन्नू क्या करेगा’ सरप्राइज करती है. फिल्म की अच्छी बात ये है कि इसमें कोई फालतू का ड्रामा नहीं है. ‘मन्नू क्या करेगा?’ आज के युवाओं की कहानी है, जो हमें रिलेटेबल लगती है. हालांकि, कुछ जगह ये फिल्म थोड़ी धीमी लगती है और कोई बड़ा ट्विस्ट न होने के कारण आपको थोड़ा बोर भी कर सकती है. लेकिन फिल्म में विनय पाठक की एंट्री से कहानी में एक नई जान आ जाती है, जो मन्नू की ‘उलझी’ हुई जिंदगी को ‘ इकिगाई’ (Ikigai) का कॉन्सेप्ट समझाकर सही राह दिखाते हैं.

निर्देशन
फिल्म का निर्देशन संजय त्रिपाठी ने किया है और उन्होंने इस कहानी को बड़े ही सरल और खूबसूरत तरीके से दिखाया है. बॉलीवुड के इस बुरे दौर में दो नए कलाकारों के साथ फिल्म करना हिम्मत की बात है, ये हिम्मत दिखाने के लिए संजय त्रिपाठी की तारीफ बनती है. लेकिन उनसे एक शिकायत जरूर है कि पूरी फिल्म में उन्होंने कोई रिस्क लेने की कोशिश नहीं की. पूरी फिल्म में वो सेफ खेलते हुए नजर आए. अगर वो रिस्क लेते तो शायद ये फिल्म और मजेदार बन सकती थी.

एक्टिंग
वहीं अगर एक्टिंग की बात करें, तो इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसके कलाकार. डेब्यू कर रहे व्योम यादव ने मन्नू के किरदार को बेहद खूबसूरती से निभाया है. मन्नू के कन्फ्यूजन वाले एक्सप्रेशन से लेकर हर सिचुएशन में बदलने वाली बॉडी लैंग्वेज तक व्योम ने ये किरदार लगभग परफेक्शन के साथ निभाया है. वहीं साची बिंद्रा ने भी अपने रोल में जान डाल दी है. कुमुद मिश्रा और चारु शंकर ने माता-पिता के किरदार में अच्छा काम किया है, लेकिन फिल्म की असली जान हैं विनय पाठक. अगर वो इस फिल्म में नहीं होते, तो पूरा समीकरण ही बदल जाता.

क्यों देखें या न देखें?
अगर आप ‘वेक अप सिड’ जैसी एक प्यारी और सिंपल फिल्म देखना चाहते हैं, जिसमें आज के यूथ की कहानी हो तो आप इसे देख सकते हैं. फिल्म में न सिर्फ एक अच्छी लव स्टोरी है, बल्कि ये आपको कनेक्ट भी करती हैं. आज का GenZ कल्चर, उनका जिंदगी की तरफ देखने का नजरिया हम इस फिल्म के जरिए समझते हैं. लेकिन, अगर आप बहुत ज़्यादा ड्रामा या एक्शन की उम्मीद कर रहे हैं, तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है. कुल मिलाकर, ये फिल्म एक अच्छी ‘वन टाइम वॉच’ है, जिसे आप वीकेंड पर देख सकते हैं.

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Vedant Samachar