दुबई,08 सितम्बर: एक छोटे से फैसले ने एक युवा छात्रा की पूरी ज़िंदगी को अंधेरे में धकेल दिया। 23 साल की ब्रिटिश नागरिक मिया ओ’ब्रायन को संयुक्त अरब अमीरात की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। मिली जानकारी के अनुसार, मिया को पिछले साल अक्टूबर 2024 में दुबई पुलिस ने 50 ग्राम क्लास ए ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था।
‘बेवकूफी’ में हुई गलती, हुई उम्रकैद
मिया दुबई में लॉ की पढ़ाई कर रही थी। जब उसे कथित रूप से कुछ संदिग्ध लोगों के साथ देखा गया। जिसके बाद जांच में पता चला कि वह एक ऐसे ग्रुप का हिस्सा थी जो नशे से संबंधित गतिविधियों में शामिल था। हालांकि मिया के परिवार का दावा है कि उसकी कोई आपराधिक मंशा नहीं थी और वह सिर्फ गलत संगत का शिकार हो गई।
मां की गुहार: “मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए”
मिया की मां डेनिएल मैककेना ने सोशल मीडिया और क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म GoFundMe के ज़रिए लोगों से मदद की अपील की थी। उन्होंने लिखा, “मिया ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। वह एक समझदार, होनहार छात्रा थी, जो बस एक गलत फैसले की वजह से अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी सज़ा भुगत रही है।”
हालांकि बाद में GoFundMe ने उनका पेज प्लेटफॉर्म की नीतियों का उल्लंघन बताकर हटा दिया। उनके प्रवक्ता के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर ऐसे मामलों में फंडिंग की अनुमति नहीं है जो किसी आपराधिक गतिविधि की कानूनी लड़ाई से जुड़े हों।
दुबई में ‘आजीवन कारावास’ का मतलब क्या है?
संयुक्त अरब अमीरात में ‘आजीवन कारावास’ का तात्पर्य आम तौर पर 15 से 25 वर्षों तक की जेल से होता है। ड्रग्स, हत्या, मानव तस्करी और आतंकवाद जैसे गंभीर अपराधों के लिए यूएई का कानून बेहद सख़्त है और ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है।
क्या वाकई सिर्फ एक गलती थी?
जहां मिया के परिवार और समर्थक इसे एक ‘मूर्खतापूर्ण गलती’ बता रहे हैं, वहीं स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि ड्रग्स के साथ पकड़े जाने पर देश में किसी तरह की नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। यहां तक कि छोटे मात्रा में भी ड्रग्स रखना गंभीर आपराधिक अपराध माना जाता है।



