गुरुग्राम,05 सितम्बर। नगर निगम अब शहर के सेक्टरों के मुख्य द्वारों पर बेतरतीब ढंग से लगे विज्ञापन बोर्ड और बैनरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने जा रहा है। निगम द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वे में सामने आया कि अधिकांश सेक्टरों के गेट बिना अनुमति के विज्ञापनों से पाट दिए गए हैं, जिससे हर साल निगम को भारी राजस्व घाटा झेलना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए निगम ने अभियान चलाकर इन विज्ञापनों को हटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
खुले सेक्टरों में अधिक समस्या
एचएसवीपी द्वारा विकसित सेक्टर-1 से 58 तक के इलाकों में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिली है। यहां कंपनियों, दुकानदारों और निजी संस्थानों के विज्ञापन बड़े पैमाने पर गेटों पर चिपकाए गए हैं। जबकि सेक्टर-59 से 115 तक बनी लाइसेंसी बिल्डरों की सोसायटियों में अपेक्षाकृत कम अवैध विज्ञापन मौजूद हैं।
आरडब्ल्यूए पर लगे आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सेक्टरों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWAs) ने विज्ञापन लगाने की आड़ में सीधे पैसों की वसूली शुरू कर रखी है। अलग-अलग सेक्टरों में तीन से पांच गेट होते हैं और लगभग हर गेट पर बड़े-बड़े होर्डिंग देखने को मिलते हैं। बताया जाता है कि विज्ञापनदाताओं से सीधा लेन-देन कर कुछ आरडब्ल्यूए फायदा कमा रहे हैं। इसका असर जहां नगर निगम की आय पर पड़ रहा है, वहीं शहर की खूबसूरती भी बिगड़ रही है।
जोनवार लिस्ट तैयार
निगम ने सभी जोन अधिकारियों को अवैध विज्ञापनों की सूची तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह का विज्ञापन लगाने से पहले निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। ऐसे में बिना अनुमति लगे बैनर और होर्डिंग स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन हैं।
जुर्माने की तैयारी
निगम की योजना है कि पहले चेतावनी देकर इन विज्ञापनों को हटाया जाएगा। यदि इसके बाद भी नियम तोड़े गए तो संबंधित आरडब्ल्यूए और विज्ञापन देने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की अवैध गतिविधियों से दूरी बनाए रखें और शहर को साफ-सुथरा बनाए रखने में सहयोग दें।



