हिमाचल प्रदेश की शांत और सुरम्य घाटियों में बसी कुल्लू की फिज़ा गुरुवार की रात अचानक मातम में बदल गई। अखाड़ा बाज़ार की संकरी गलियों में जब लोग नमाज़ के बाद चैन की नींद सो रहे थे, तभी कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि हर कोई सन्न रह गया।
बता दें कि पहाड़ी से आए भारी मलबे ने दो मकानों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें सात लोग सोते वक्त दब गए। हादसे की गूंज और लोगों की चीख-पुकार से पूरी घाटी कांप उठी।
रात के अंधेरे में राहत अभियान, चुनौती बनी मलबे की मोटी परत
जैसे ही घटना की सूचना प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम को मिली, स्थानीय पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। रातभर राहत और बचाव का कार्य चलता रहा, लेकिन लगातार हो रही बारिश और अंधेरे ने मुश्किलें और बढ़ा दीं।
पहली सुबह की किरण के साथ मलबे से एक व्यक्ति का शव बरामद किया गया, जिनकी पहचान श्रीनगर निवासी महाराज के रूप में हुई। इस दुखद खबर ने पूरे इलाके को शोक और खौफ में डुबो दिया।
तीन घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में निगरानी में रखा गया है।
अब भी छह लोगों की तलाश
प्रशासन का अनुमान है कि अभी मलबे के नीचे छह और लोग फंसे हो सकते हैं। भारी मलबे के चलते बचाव कार्य धीमा और बेहद जोखिम भरा है। घटनास्थल पर परिजनों की भीड़ लगातार दुआओं में मशगूल है किसी की मां, किसी का बेटा, किसी की बहन अब भी मलबे में दबी हो सकती है।
आसपास के इलाकों में भी डर का माहौल
इस हादसे ने कुल्लू के अखाड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी डर का माहौल बना दिया है। कई परिवारों ने अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों या सुरक्षित जगहों पर शरण लेना शुरू कर दिया है।
बारिश का दौर अभी भी थमा नहीं है और पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और गैरज़रूरी यात्रा से बचें।
मुख्यमंत्री ने हादसे पर किया दुख व्यक्त
राज्य के मुख्यमंत्री ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और जिला प्रशासन को तत्काल राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है और हर संभव मदद सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और धैर्य बनाए रखने की अपील की है।



